गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर तीर्थ पर भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप स्थापित कर दिया गया है। सोमवार को भगवान के स्वरूप के आगे कई पेड़ों की शाखाओं को ग्रीन अर्थ संस्था के पदाधिकारियों की उपस्थिति में काटा गया, ताकी भगवान का विशाल स्वरूप दूर से भी देखा जा सके। विश्व को कर्म का संदेश देने वाली गीता जी की जन्मस्थली ज्योतिसर में स्थापित किए गए इस विशाल स्वरूप की कीमत करीब 10 करोड़ है।
भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को उत्तर प्रदेश के नोएडा से ट्रक ट्रालों की मदद से लाया गया था। इस विशालकाय विराट स्वरूप के केवल चेहरे का वजन 6 टन से ज्यादा है। प्रतिमा के भारी भरकम हिस्सों को क्रेन की मदद से एक दूसरे के ऊपर जोड़ा गया। यह प्रतिमा विश्व विख्यात मूर्तिकार राम सुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार ने 80 कारीगरों की मदद से एक साल में तैयार की है। करीब 35 टन के विराट स्वरूप में 9 चेहरे हैं, इनमें योगेश्वर कृष्ण के अलावा श्री गणेश, ब्रह्मा जी, शिव, भगवान विष्णु का नरसिंह रूप हनुमान जी ,भगवान परशुराम, एग्रीव और अग्नि देव और पांवों से लेकर मूर्ति से लिपटे सिर के ऊपर छांव करते शेषनाग के दर्शन हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में देश विदेश से कुरुक्षेत्र पहुंचने वाले लोगों के अलावा साल भर कुरुक्षेत्र आने वाले तीर्थ यात्रियों और सैलानियों के लिए अब कुरुक्षेत्र में यह नया आकर्षण होगा।
विराट स्वरूप चार धातुओं से बना है
पूर्ण विराट स्वरूप की ऊंचाई 40 फीट से ज्यादा है,जो 10 फुट ऊंचे प्लेटफार्म पर स्थापित किया गया है। विराट स्वरूप चार धातुओं से मिलकर बना है, जबकि 85 प्रतिशत तांबा और 15 प्रतिशत अन्य तीन धातुओं का इस्तेमाल हुआ है। इस मूर्ति को नोएडा स्थित वर्कशाप में करीब एक वर्ष में 80 कारीगरों की मदद से तैयार किया गया है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ अनुभव मेहता ने कहा कि फिलहाल विराट स्वरूप के आसपास कई कार्य होंगे। फिलहाल तो स्वरूप को सिर्फ खड़ा ही किया गया है। बाकी काम पूरा होने पर जल्द ही इसका उद्घाटन कराया जाएगा।