कुरुक्षेत्र। बढ़ता तापमान फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। अप्रैल माह में बढ़ते तापमान और लू का सब्जियों की फसलों के लिए अधिक खतरा है। लगभग 38 डिग्री सेल्सियस तापमान सब्जियों की फसलों के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। गर्मी के कारण मिट्टी की नमी कम हो जाती है, रस चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ता है और पौधों में फूल व फल कम लगते हैं।
इससे पैदावार में 10-30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. सीबी सिंह ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच अधिक तापमान रहता है। टमाटर, मिर्च, और बैंगन जैसी फसलों में अत्यधिक गर्मी 35 डिग्री से ऊपर तापमान के कारण फूल और पराग खराब हो जाते हैं। इससे फल कम लगते हैं। लू, तेज गर्म हवाएं और मिट्टी का बढ़ता तापमान पौधों की सामान्य वृद्धि को रोक देता है।
पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और पौधे छोटे रह जाते हैं। तेज धूप के कारण सब्जियों में सनबर्न या झुलसन की समस्या हो जाती है जिससे फल खराब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी से मिट्टी में नमी बहुत तेजी से उड़ती है जिससे पौधों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। गर्मी के कारण रस चूसक कीटों (जैसे सफेद मक्खी) का हमला बढ़ जाता है। इससे मिर्च और बेल वाली फसलों जैसे ककड़ी, लौकी इत्यादि को काफी नुकसान होता है।
बचाव के लिए जमीन की नमी बनाए रखने और मिट्टी का तापमान कम करने के लिए पौधों की जड़ों के पास सूखी घास या प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग करें। खेत में हल्की और नियमित सिंचाई करें। सिंचाई हमेशा सुबह जल्दी या शाम के समय करें, दोपहर में सिंचाई से बचें। ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह पानी की बचत के साथ सीधे जड़ों को नमी पहुंचाती है।