कुरुक्षेत्र। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध के विरोध में जन संघर्ष मंच हरियाणा, मनरेगा मजदूर यूनियन और निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन की ओर से जनसभा आयोजित की गई। मदन लाल ढींगरा पार्क से शुरू होकर संगठनों ने मेन बाजार, कच्चा घेर और अंबेडकर चौक पर मार्च निकाला। इस दौरान संगठनों ने आवाज उठाई कि कामकाजी महिलाओं को कार्यालय और रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
संगठनों ने सफीदों की रंग फैक्टरी में आग लगने से पांच महिला मजदूरों की मौत पर दो मिनट का मौन रखा। मंच महासचिव एडवोकेट सुदेश कुमारी ने कहा कि महिला दिवस का इतिहास कामकाजी महिलाओं की ओर से कार्यस्थल पर शोषण, दमन, उत्पीड़न, लैंगिक असमानता के खिलाफ, आठ घंटे का कार्यदिवस, समान काम-समान वेतन, शिक्षा स्वास्थ्य व सार्वभौमिक मताधिकार आदि मांगों के लिए किए संघर्षों का गौरवशाली इतिहास है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1908 में अमेरिका के शहर न्यूयॉर्क में महिला मजदूरों ने अपनी मांगों के लिए हड़ताल और विशाल प्रदर्शन किया था।
8 मार्च 1910 को डेनमार्क के कोपेनहेगन शहर में महिला सम्मेलन में मार्क्सवादी मजदूर नेता क्लारा जेटकिन ने संघर्ष को यादगार बनाने के लिए 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा, जो सर्वसम्मति से पास हुआ। तब से महिलाएं जुल्म-अत्याचार और शोषण-दमन, लैंगिक असमानता से मुक्ति हासिल करने के लिए संघर्षों के प्रतीक 8 मार्च को संकल्प दिवस के रूप में मनाती हैं। जनसभा का संचालन कविता विद्रोही ने किया। इस अवसर पर उषा कुमारी, पूर्व प्राचार्या रेखा धीमान, महासचिव सोमनाथ, बबली, मेवा राम, बलकार, पूजा, सीमा, वाणी, प्रतिमा, हरजिंदर कौर, वीनू, याशना, करनैल सिंह, सुरेश और चांदी राम सहित अन्य मौजूद रहे।