कुरुक्षेत्र। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों से प्राकृतिक खेती का रुझान बढ़ रहा है। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से 30 से अधिक किसानों और कृषि अधिकारियों ने प्रशिक्षण लिया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम दो से पांच अगस्त तक चला, जिसके समापन पर प्रमाण पत्र दिए गए।
प्रशिक्षण के दौरान दल ने गुरुकुल के प्राकृतिक फॉर्म का भ्रमण किया। उन्होंने बिना रासायनिक उर्वरकों के उगाई जा रही फसलें देखीं। कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. हरिओम और डॉ. बलजीत सहारण ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलू बताए। उन्होंने रासायनिक खेती का त्याग भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक बताया। गुरुकुल व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने कहा, प्राकृतिक खेती से गोवंश, मित्रकीटों का संरक्षण होता है। इससे मृदा स्वास्थ्य सुधरता है, लागत शून्य होती है और आय दोगुनी होती है।