कुरुक्षेत्र। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बाबैन खंड के संघौर गांव की उषा देवी ने मिसाल कायम की है। सरस्वती स्वयं सहायता समूह की सदस्य उषा देवी ने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है बल्कि आज वह 10 से ज्यादा महिलाओं को भी रोजगार दे रही है। सरसों का शुद्ध तेल तैयार कर अचार में प्रयोग करेंगी। वह छह साल से अचार बनाने का कार्य कर रही हैं लेकिन अब अपने घर से निकाले गए रसायन मुक्त तेल का प्रयोग करके पूरी तरह स्वदेशी और शुद्ध अचार तैयार करेंगी। इसके लिए घर पर ही कोल्हू लगाया है।
आठवीं पास उषा ने इस कार्य की शुरुआत महज 450 रुपये से की थी। आज वह न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी है। इसके अलावा वह अब तक 32 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अचार बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उषा का कहना है कि बाजार में मिलने वाले अचार में मिलावटी तेल और रसायनों का इस्तेमाल होता है, जिससे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। इसी सोच के चलते उन्होंने घर पर कोल्हू लगाकर शुद्ध सरसों का तेल निकालने की सोची ताकि उनका बनाया अचार पूरी तरह प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक हों। वह करीब 35 प्रकार के अचार तैयार करती हैं, जिनमें आम, नींबू, लहसुन, अदरक, करेला, शलगम, गाजर, मिर्च, आंवला, मूली, बेल और मिक्स अचार शामिल हैं। इन अचार की खासियत यह है कि इनमें कोई केमिकल नहीं मिलाया जाता।
ऑनलाइन माध्यम से देशभर में अचार पहुंचाने की तैयारी
उषा देवी ने बताया कि अब वह अपने उत्पादों को ऑनलाइन माध्यम से बेचने की तैयारी कर रही है। अचार पूरी तरह रसायन मुक्त हो, इसलिए घर पर कोल्हू लगाया है कि अचार में शुद्ध तेल का ही प्रयोग हो। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही जीएसटी नंबर लेंगी ताकि उनका अचार कारोबार पूरे देश में पहुंच सके। उनका कहना है कि वह स्वयं सहायता समूह के साथ 2019 में जुड़ी थी, जब 450 रुपये से काम शुरू किया था और अब 15 से 20 हजार आमदनी है व आठ से 10 महिलाओं को रोजगार भी दे रखा है।
नीम की लकड़ी से बनी है कोल्हू की ओखल
स्वयं सहायता समूह के कार्यक्रम अधिकारी नरेश कुमार ने कहा कि उषा देवर ने जो अचार के शुद्ध उत्पादन हेतु घर पर कोल्हू लगाया है, उसकी ओखल नीम की लकड़ी से बनी है और यह बैल से चलेगा। जैसे-जैसे बैल कोल्हू घुमाएगा, नीम के औषधीय तत्व तेल में मिलेंगे, जिससे तेल और अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनेगा। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं उद्योग बढ़ाना चाहती हैं, समूह उन्हें हर तरह का सहयोग देता है। समूह का उद्देश्य हर महिला को आत्मनिर्भर बनाना है।