फैक्टरी में काम करते हुए श्रमिक। आर्काइव
- निर्यातकों की बढ़ी चिंता, कई ने काम बंद कर दूसरे देशों के खरीदारों के साथ शुरू किया संपर्क
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। टैरिफ के बाद अमेरिका में भारतीय व्यापार आधे से भी कम हो गया है। ऐसे में निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। निर्यातकों के पास इक्का-दुक्का खरीदार हैं। ऐसे में वे भी अपनी शर्त थोप रहे हैं। कई निर्यातक उनकी शर्तों पर काम कर रहे हैं जबकि कई ने काम बंद कर दूसरे देशों के खरीदारों के साथ संपर्क तेज कर दिया है। विदेशी व्यापार के जानकारों ने दूसरे देशों में भी व्यापार की इतनी अच्छी स्थिति न होने की बात कही है। निर्यातकों को टैरिफ नीति के नए कदम का इंतजार है।
पानीपत से हर साल करीब 20 हजार करोड़ का निर्यात होता था। इसमें अकेला अमेरिका में 50 प्रतिशत यानी 10 हजार करोड़ रुपये का बाजार था। अमेरिका के साथ दूसरे देशों में भी बाजार मजबूत था। अमेरिका में पहले भारतीय उत्पादों पर टैरिफ छह फीसदी था। इसे अप्रैल में पहले 25 और फिर सीधे 50 प्रतिशत कर दिया। अगस्त महीने के आखिरी दिनों में नया टैरिफ लागू होने के बाद टेक्सटाइल उत्पादों के ऑर्डर मिलने बंद हो गए। कुछ निर्यातक खुद पीछे हट गए। ऐसे में अब पानीपत से अमेरिका का निर्यात 30 से 40 प्रतिशत रह गया। निर्यातक इसे भी अपने स्तर पर चला रहे हैं।
अब एक शिफ्ट या आधे श्रमिकों से चला रहे काम
अमेरिका के टैरिफ का असर उद्योगों पर सीधे तौर पर पड़ा है। कई बड़े निर्यातक हाउस की भी कैपेसिटी आधी रह गई है। नवंबर महीने में ओवरटाइम और अतिरिक्त स्टाफ के साथ चलने वाले उद्योग अब एक शिफ्ट या फिर आधे श्रमिकों के साथ चल रहे हैं। नवंबर महीने में ही श्रमिकों की संख्या आधी कर दी है। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले साल इन दिनों में सांस लेने तक की फुर्सत नहीं थी और आज काम की तलाश की जा रही है। निर्यातक किसी प्रकार का बोझ लेने को तैयार नहीं हैं।
उद्यमी बोले- निर्यात काे सहारे की जरूरत
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ के बाद पानीपत का निर्यात लगातार कम होता जा रहा है। निर्यातक खुद का मुनाफा कर व्यापार कर रहे हैं। खरीदार इस पर भी अपनी शर्त लगा रहे हैं। ऐसे में मजबूरन बहुत कम मुनाफे के साथ व्यापार किया जा रहा है। निर्यातकों को केंद्र सरकार की पहल का इंतजार है। हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि अमेरिका के साथ दूसरे देशों में भी व्यापार उठ नहीं पा रहा है। नए ऑर्डर उद्यमियों के आपसी संबंध व तालमेल से ही मिल रहे हैं। सरकार को इसमें आगे आकर काम करना चाहिए।