कुरुक्षेत्र। कुवि का श्रीकृष्ण द्वार।
कुरुक्षेत्र। लंबे समय से न्याय की राह देख रहे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हॉस्टल मेस कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। सिविल जज देवेंद्र (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने विवि प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि इन कर्मचारियों की सेवाएं प्रदेश सरकार की 1 अक्तूबर 2003 की नीति के तहत नियमित की जाएं।
अदालत ने कहा कि 40 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को अब नौकरी की स्थिरता और समान वेतन का लाभ मिलना चाहिए। इस मामले में पहले लेबर कोर्ट अंबाला ने 31 मार्च 2017 को अपना फैसला सुनाया था जिसमें विश्वविद्यालय को आदेश दिया गया था कि कर्मचारियों को नियमित किया जाए और बाकी कर्मचारियों की तरह वेतन दिया जाए। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय ने आपत्ति दर्ज करवाई लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी 9 जुलाई 2025 को साफ कर दिया कि कर्मचारियों को नियमित करने से इन्कार सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि विश्वविद्यालय में पद नहीं हैं। यदि कानून नियमितीकरण का अधिकार देता है तो विश्वविद्यालय को पद सृजित करने होंगे।
अदालत ने कहा कि इतने वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों और विश्वविद्यालय के बीच नियोक्ता और कर्मचारी का रिश्ता है। ऐसे में उन्हें नियमित करने से इन्कार करना न्यायसंगत नहीं है। सिविल जज ने 106 कर्मचारियों की सूची भी रिकॉर्ड पर होने का जिक्र करते हुए कहा कि अब विश्वविद्यालय जल्द से जल्द सभी औपचारिकताएं पूरी कर सेवाओं का नियमितीकरण करे और 15 अक्तूबर 2025 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। हॉस्टल मेस वर्कर कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुभाष पारचा का कहना है कि अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। अब सभी कर्मचारियों की निगाहें इसी पर टिकी हैं कि विवि इसे कब से लागू करेगा।
कुरुक्षेत्र। कुवि का श्रीकृष्ण द्वार।