पानीपत। सोशल मीडिया और स्मॉर्टफोन फोन का असर बच्चों की दिमाग पर इस कदर हावी हो चुका है कि अब बच्चे माता-पिता की डांट को बर्दाश्त नहीं करते आैर कभी-कभी ऐसा कदम उठाते हैं िक पूरे परिवार को जीवन भर का दंश भुगतना पड़ता है।
मोबाइल से दूर रहने और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहने पर ही बच्चे घर से निकल जाते हैं। जिसके बाद माता-पिता को उनकी तलाश के लिए परेशान होना पड़ता है।
बाल कल्याण समिति के सामने भी माह में आठ से 10 केस पहुंच रहे हैं। बाल कल्याण समिति कार्यालय में कई ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। जिनमें 10 से 15 साल की उम्र के बच्चे गुस्से में घर से निकल जाते हैं।
इस तरह के मामलों में गौरतलब है कि जैसे जैसे स्कूलों में परीक्षाएं शुरू हो रही हैं तो इस तरह के मामले भी बढ़ रहे हैं। घर से निकलने वाले बाद परेशान होकर वापस घर पहुंचते हैं या फिर पुलिस द्वारा बच्चों की तलाश कराई जाती है।
जब उन बच्चों की काउंसिलिंग होती है तो वह माता-पिता की डांट से गुस्से में घर छोड़ने की बात करते हैं। इस संबंध में बाल कल्याण समिति के सदस्य किरण मलिक ने बताया कि उनके पास इस तरह के मामले लगातार आ रहे हैं। बच्चों को समझाकर उनके माता-पिता के सुपुर्द किया जाता है।