कुरुक्षेत्र। 25 साल के बाद सन्निहित सरोवर पर दूसरी बार मंत्रोच्चारण, परंपरा और विधि-विधान के अनुसार दो दिवसीय वामन द्वादशी मेले का शुभारंभ हुआ। सुबह के सत्र में विधायक सुभाष सुधा ने बतौर मुख्यातिथि दीपशिखा प्रज्ज्वलित कर वामन पुराण कथा का श्रीगणेश किया। कथा व्यास आचार्य शुकदेव ने जैसे ही कथा शुरू की तीर्थ स्थल वामन भगवान के जयकारों से गूंज उठा। इस मौके पर विधायक सुधा ने सरस्वती आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल मोहाली की ओर से आयोजित चिकित्सा शिविर का भी उद्घाटन किया। डॉ. नेहा शर्मा, डॉ. नितिका की टीम ने औषधीय पौधे लगाए।
विधायक ने कहा कि सन्निहित सरोवर को दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एक नया प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में शहर की समाजसेवी व धार्मिक संस्थाओं का योगदान लिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए एक कमेटी का भी गठन होगा। सभी के साझे प्रयासों से प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष रखा जाएगा और मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया जाएगा। वामन द्वादशी का मेला कुरुक्षेत्र का गौरव है। भारतीय परंपराओं में वामन भगवान का अवतार भगवान विष्णु का मानव के रूप में प्रथम अवतरण है।
गीता जयंती की तरह बड़ा रूप लेगा यह मेला
विधायक सुभाष सुधा ने कहा गीता जयंती ने जिस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्वरूप पाया है उसी प्रकार वामन द्वादशी का यह मेला भी बड़ा रुप लेगा। कार्यक्रम में सभा मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा, श्रीप्रकाश मिश्रा, पूर्व पार्षद नरेंद्र शर्मा निंदी, कृष्ण कुमार कौशिक, डॉ. सत्यदेव, यशवेंद्र शर्मा, पवन शर्मा, नितिन भारद्वाज, विश्वकांत, डॉ. राममेहर अत्री, ओम गोपाल शर्मा, राजीव शर्मा, हन्नी शर्मा, एमके मोदगिल, संरक्षक सीता देवी, निशी गुप्ता, सत्या शर्मा, राजेश वत्स, अशोक भारद्वाज सहित अन्य मौजूद रहे।
नगर की 32 संस्थाओं के सहयोग से कराया जा रहा है यह मेला
वामन द्वादशी मेले का आयोजन श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्घार सभा की तरफ से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, हरियाणा कला परिषद समेत नगर की 32 संस्थाओं के सहयोग से कराया जा रहा है। सभा का उद्देश्य प्राचीन परंपरा व सांस्कृतिक धरोहर को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ उन्हें खेलों की तरफ आकर्षित करना है। 25 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद पिछले साल ही इस परंपरा को पुन: जागृत किया गया।
मेले का बदला स्वरूप
25 साल के बाद शुरू हुए इस मेले का स्वरूप भी काफी बदल गया है। बुधवार को सभा की ओर से भव्य शोभायात्रा दुखभंजन महादेव मंदिर से निकाली जाएगी, मगर पहले यह शोभायात्रा ब्रह्माजी की उत्पत्ति स्थल नाभि कमल मंदिर से निकाली जाती थी। हालांकि पहले से ही भगवान वामन को सन्निहित सरोवर में ही नौका विहार कराया जाता रहा है।
ड्रम पर पालकी बांधकर कराया जाता था नौका विहार
25 साल पहले भगवान की पालकी को कैथल में तैयार कराया जाता था। इसे ट्रेन में रखकर कुरुक्षेत्र लेकर आते थे। इस पालकी को ड्रम पर लकड़ियों को स्पाट रखकर भगवान का नौका विहार होता था। आजकल नाव में ही नौका विहार की प्रचलन है।