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व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन करने वाला पहला प्रदेश : गर्ग

Sun, 19 Feb 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन गोपालशरण गर्ग ने सुनीं समस्याएं - फोटो : अमर उजाला
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व्यापारियों की समस्याओं के समाधान करने तथा सरकार के बीच तालमेल करने के लिए इस बोर्ड का निर्माण किया गया है। पूरे देश में हरियाणा पहला प्रदेश है, जिसमें यह बोर्ड गठित किया गया। बोर्ड का गठन कर प्रदेश सरकार ने चुनावों के समय व्यापारियों को किया गया वादा पूरा किया है। ये बातें हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन गोपालशरण गर्ग ने कहीं।
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वे यहां मंडी पूर्व प्रधान टोनी कंसल के प्रतिष्ठान पर व्यापारियों की समस्याएं सुनते वक्त ये बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने 19 सदस्सीय बोर्ड का निर्माण कर व्यापारियों को एक नई सौगात दी है। इससे व्यापारी सीधे अपनी समस्याएं एवं उनका हल करने की सलाह को बोर्ड के सदस्यों के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। यदि अधिकारी उनकी समस्या का समाधान करने में सक्षम नहीं है तो यह बोर्ड व्यापारियों की समस्याओं को मुख्य तौर पर उठाकर मुख्यमंत्री के समक्ष रखते हुए जल्द समाधान कराएगा। इसके अलावा बोर्ड ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक जिले में व्यापारी के बैठने के लिए इमारत बनाई जाए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि व्यापारियों द्वारा भरे गए टैक्स का कुछ हिस्सा व्यापारी कल्याण बोर्ड को दिया जाए ताकि जो व्यापार में अधिक नुकसान झेलते हैं, उनकी मदद की जा सके।

इस अवसर पर विनोद कंसल, प्रह्लाद भगत शर्मा, सतीश बंसल, जगदीश पपनेजा, महिंद्र थांदडो, पुरुषोत्तम कंसल, बलदेव शर्मा, अनिल गर्ग, नरेश बंसल, संजीव रहेजा, रमेश बंसल, नरेंद्र कंसल, दीपक सिंधवानी, जोगिंद्र, तरुण गर्ग, संजय गर्ग, रोहित, बलजीत सिंह, संदीप कंसल, रूपेश गांधी, पवन कंसल, देवराज गर्ग, वेदप्रकाश, कैलाशचंद, झांसा से महेंद्र जिंदल, नरेश शर्मा, बिट्टू कंसल, लाला, मितू जिंदल तथा मोहित बंसल सहित अन्य मौजूद रहे।
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व्यापारियों ने रखीं ये समस्याएं
राइस मिलरों ने चेयरमैन के समक्ष मांग रखी कि वे सरकारी धान की कुटाई का कार्य करते हैं, जिसके चावल का भुगतान करने के लिए सरकार ने समय और मात्रा निर्धारित की हुई है, लेकिन इस समय सरकार के पास चावल के भुगतान की डिलीवरी लेने के लिए जगह नहीं है और इसका खामियाजा राइस मिलरों को होल्डिंग चार्ज देकर चुकाना पड़ता है, जो राइस मिलरों के साथ अन्याय है। कहा कि सरकार या तो जगह उपलब्ध कराए या होल्डिंग चार्ज खत्म करे। आढ़तियों ने मांग रखी कि मंडी में अनाज की आवक बढ़ने से जगह कम पड़ने लगी है, मंडी को बढ़ाया जाए तथा गेहूं उठान का ठेका किसी ठेकेदार को न देकर आढ़ती को दिया जाए। अनाज की पेमेंट सीधे किसान को न देकर आढ़ती के माध्यम से ही कराई जाए।
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