एक ओर जहां भाजपा के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने जाट आरक्षण का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर सांसद राजकुमार सैनी ने जाट आरक्षण का खुलकर विरोध करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शनिवार को ओबीसी ब्रिगेड के सदस्यों की बैठक बुलाई और उन्हें पगड़ी बांधकर ओबीसी ब्रिगेड के बैनर तले जाट आरक्षण का विरोध करने के लिए तैयार होने को कहा। सैनी ने कहा कि जाट समुदाय प्रदेश और दिल्ली बंद करने की धमकियां दे रहा है, लेकिन ओबीसी ब्रिगेड के सदस्य जाट आरक्षण मुहिम का खुलकर विरोध करेंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे।
सैनी शनिवार को सेक्टर-3 स्थित आवास पर पिछड़ा वर्ग समन्वयक समिति के तत्वावधान में प्रदेशभर के पिछड़ा वर्ग संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। सांसद ने हाल ही में वायरल हुए वीडियो जिसमें उन पर अनर्गल टिप्पणी की गई है के जवाब में कहा कि यदि जाटों के बारे में कोई दलित या पिछड़ा वर्ग का नेता या व्यक्ति ऐसी बात कर देता तो अब तक तिहाड़ जेल में बंद होता।
सांसद सैनी ने विभिन्न पिछड़ा संगठनों व बिरादरियों के दो सौ से अधिक नेताओं को पगड़ियां बांधी।
बीरेंद्र एक बिरादरी के पक्षधर
सैनी ने कहा कि यह पगड़ी इसलिए है कि अब जाट आरक्षण का विरोध खुलकर करने का समय आ गया है। उन्होंने ओबीसी समाज के नेताओं को राष्ट्र कल्याण की शपथ दिलवाई। सैनी ने जाट आरक्षण के पक्षधर केंद्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे एक ही बिरादरी की पैरवी कर रहे हैं, जबकि 35 की अनदेखी।
सैनी ने साफ कहा कि अब वो टाइम नहीं है जब इस दबंग समुदाय से पिछड़ा और दलित वर्ग डरता था। अब पिछड़ा वर्ग अपने हकों की सुरक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस प्रकार जाट आरक्षण मांगने वाले सड़क जाम और 35 बिरादरी के लोगों के हक को छीनना चाहते हैं। उसी आंदोलन के खिलाफ उन्होंने पगड़ी वाले ओबीसी ब्रिगेड के सदस्य तैयार किए हैं जो समय आने पर लोगों की मदद करेंगे और आरक्षण के समर्थन में आंदोलन करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देंगे।
अगर जाटों को आरक्षण मिलना चाहिए तो बनिया, ब्राह्मण, पंजाबी और राजपूत समेत अधिकांश में क्या बुराई है, जिन्होंने आज तक आरक्षण नही मांगा।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर रामपाल राठी, दरबारी लाल चौहान, सतीश यादव, शकुंतला वर्मा, बबीता पांचाल, देवेन्द्र पांचाल, विजेन्द्र सैनी, दीपक सैनी, गौरव वर्मा, राजेन्द्र स्नेही, नवनीत सैनी, जयराम कश्यप, आशु बिशनगढ़, महेंद्र सिंह, सुरेन्द्र रोहिल्ला, मोहन लाल धीमान, सुखबीर सैनी, जगन्नाथ हरियापूर, लाल बहादूर खोवाल समेत भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।