कुरुक्षेत्र। होली का त्योहार केवल रंगों और उल्लास का उत्सव नहीं है, बल्कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए सर्वकल्याण की भावना से जग ज्योति दरबार में 12 मार्च से विशेष होलिका अनुष्ठान प्रारंभ होगा। जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि अनुष्ठान का समापन 14 मार्च को देवी देवताओं के साथ होली खेलते हुए व यज्ञ में पूर्णाहुतियों के साथ होगा। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि होली के दिनों में देवी-देवताओं की पूजा करना शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार होली के अवसर पर पूजा और साधना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। उन्होंने बताया कि होली का त्योहार भक्त प्रहलाद और भगवान विष्णु से गहराई से जुड़ा हुआ है। जब हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को समाप्त करने के लिए होलिका को भेजा तब भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर समाप्त हो गई। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की आराधना करने से भी प्रेम, सौहार्द्र और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।