कुरुक्षेत्र। मधुमक्खी पालन प्रबंधन में आयोजित शिविर में हिस्सा लेने वाली विशेषज्ञ को स्मृति
कुरुक्षेत्र। बागवानी विभाग की ओर से आईबीडीसी, रामनगर में इंडो-इजराईल के तहत मधुमक्खी पालन प्रबंधन पर 19 से 21 नवंबर तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के 15 राज्यों से लगभग 70 अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के तीसरे एवं अंतिम दिन मधुमक्खी पालन से संबंधित विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल से डाॅ. गौरव सिंह, केंद्र की लैब एक्सपर्ट डाॅ. नेहा चौधरी, गुजरात के सयुंक्त निदेशक बागवानी डाॅ. जतिन पटेल तथा तमिलनाडू के बागवानी उप-निदेशक डाॅ. एसएन दलीप द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
इस दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने मधुमक्खी पालन के द्वारा परागीकरण, मधुमक्खी पालन से प्राप्त होने वाले उत्पाद, गुणवत्ता नियंत्रण रानी मधुमक्खी गुणन तथा शहद व अन्य उत्पादों द्वारा मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर अपने अनुभव सांझा किए व प्रतिभागियों को अलग-अलग विषयों पर जानकारी प्रदान की। इस दौरान मधुमक्खियों से परागीकरण के फायदों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया।
इस दौरान बागवानी विभाग, हरियाणा के विशेष विभागाध्यक्ष डाॅ. अर्जुन सिंह सैनी ने उपस्थिति सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए एवं मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए किसानों के हित के लिए कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस केंद्र में विश्व स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला की भी स्थापना की जायेगी। इसका निर्माण 20 करोड़ से होगा। इसके बाद किसान अपने शहद की गुणवत्ता की जांच के बाद इसे उचित दामों पर निर्यात कर सकेंगे। उसके बाद उन्होंने इजराईल सरकार द्वारा लगातार विभाग को दी जा रही तकनीकि सहायता हेतु मंच पर उपस्थित उरी रूबिस्टीन, कृषि अताशे, इजराईल का आभार व्यक्त किया।