सरकार अस्पतालों में हर प्रकार की सुविधा देने की बात कह रही है, लेकिन वास्तविकता इससे कोसो दूर है। कई सरकारी अस्पतालों में दवाइयों का टोटा है तो कहीं डॉक्टरों की कमी के कारण मरीज धक्के खाने को मजबूर हैं। इसी तरह शहर के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में पिछले करीब चार साल से दंत चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई, जिस कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर वासी गौरव शर्मा, राजवीर, अश्विनी, अनिल कुमार, बलदेव शर्मा व सौरव आदि ने बताया कि इस पीएचसी पर करीब 15 गांवों के लोग के स्वास्थ्य का जिम्मा है। वहीं पड़ोसी राज्य पंजाब के सीमावर्ती गांवों के सैकड़ों लोग भी इस पीएचसी पर निर्भर करते हैं, लेकिन यहां पर दंत चिकित्सक न होने से मरीजों को मायूस होकर निजी अस्पतालों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।
जानकारी के अनुसार 2018 में यहां डॉ. गौरव शर्मा तैनात थे। उस समय मरीजों की ओपीडी प्रतिदिन 100 से भी ज्यादा थी। अगस्त 2018 डॉ. गौरव शर्मा का तबादला हो गया था। मरीजों की इतनी संख्या होने के बाद भी यहां पर दंत चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई, जिसको लेकर मरीजों ने कई बार यहां दंत चिकित्सक की नियुक्त को लेकर मांग भी रखी, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। कई बार मांग करने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां अस्थाई तौर पर एक दंत चिकित्सक की नियुक्ति की गई है जो सप्ताह में केवल एक दिन ही यहां आते हैं। स्थाई डॉक्टर न होने कारण मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है और ओपीडी घट कर महज 10 पर रह गई हैं।
सीएचसी झांसा के प्रभारी डॉ. प्रदीप ने कहा कि यहां पर स्थाई दंत चिकित्सक की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के संज्ञान में मामला है। फिलहाल लोगों की समस्या को देखते हुए एक दिन के लिए डॉ. जस किरण को अस्थाई तौर पर नियुक्त किया गया है, जो प्रत्येक मंगलवार को अस्पताल में आकर मरीजों का चेकअप करती हैं।