कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को धर्मनगरी में ब्रह्मसरोवर के घाटों पर लघु भारत का नजारा दिखाई दिया। यहां पर विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने लोक नृत्यों से अपने-अपने राज्य की संस्कृति का रंग जमाया तो हजारों की संख्या में पहुंचे पर्यटक भी गदगद हो उठे। महोत्सव में पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों से सैकड़ों कलाकार में पहुंचे हैं। ब्रह्मसरोवर के चारों ओर वाद्य यंत्रों की धुनें गूंजने लगीं हैं। महोत्सव के दूसरे दिन कलाकारों ने भी न केवल अपनी-अपनी संस्कृति व लोक कला को नई पहचान देने का प्रयास किया बल्कि अमिट छाप भी छोड़ी, जिसके साथ ही पर्यटक भी झूमने को मजबूर हो गए।
ब्रह्मसरोवर के घाटों पर शुक्रवार को कई राज्यों की लोक संस्कृति के रंग देखने को मिले। इस लोक संस्कृति को देखने के लिए पर्यटक उत्साहित दिखे। यहां पहुंचे कलाकार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर 15 दिसंबर तक लोगों को अपने-अपने प्रदेशों की लोक कला के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे। कलाकारों ने शुक्रवार को अपनी प्रतिभा से अपने-अपने राज्य की कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों का कहना है कि आज के आधुनिक जमाने में भी उन्होंने अपनी कला को जिंदा रखा है। वे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी कला को विदेशों तक पहुंचा रहे हैं। जिससे भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन हो रहा है।