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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र के 48 कोस के सभी 164 तीर्थों पर गूंजेंगे गीता के श्लोक

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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव इस बार सात से 24 दिसंबर तक मनाया जाएगा। इसके लिए जोरशोर से तैयारियां की जा रही हैं। मुख्य आयोजन पवित्र ब्रह्मसरोवर पर होंगे और यहीं पर शिल्प व सरस मेला भी लगाया जाएगा, लेकिन महोत्सव की झलक कुरुक्षेत्र के 48 कोस के अंर्तगत आने वाले सभी 164 तीर्थों पर दिखाई देगी। यहां न केवल गीता के श्लोक गूंजेंगे, बल्कि हवन यज्ञ व अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इन तीर्थों पर स्कूली बच्चों के कार्यक्रम भी करवाए जाएंगे। यह पहला मौका होगा जब सभी तीर्थों पर इस स्तर का आयोजन होगा।
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तीर्थ स्थलों पर यह महोत्सव मनाए जाने की शुरुआत हालांकि पिछले वर्ष की गई थी, लेकिन उस दौरान भी 75 तीर्थों पर ही आयोजन किया जा सका था। अब सभी 164 तीर्थों पर महोत्सव मनाने को लेकर न केवल केडीबी व तीर्थ निगरानी कमेटी ने तैयारी शुरू कर दी है, बल्कि तीर्थ कमेटियां भी अपने स्तर पर तैयारी कर रही हैं। संबंधित क्षेत्र की धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है, जिसके चलते इस बार महोत्सव में करीब 200 संस्थाओं के जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। विदित हो कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 17 से 23 दिसंबर तक होने हैं। इसी दौरान ही पवित्र ब्रह्मसरोवर पर तीर्थ सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी तीर्थ कमेटी के प्रतिनिधि शामिल होंगे और मुख्यमंत्री मनोहर लाल उनके साथ चर्चा करेंगे। इस दौरान तीर्थों के विकास को लेकर भी खाका खींचे जाने की संभावना है।


कैथल में सबसे ज्यादा तीर्थ

कुरुक्षेत्र के 48 कोस के अंतर्गत 164 तीर्थ हैं, जिनमें सबसे ज्यादा कैथल के 61 तीर्थ शामिल हैं। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में 45, करनाल में 39, जींद में 18 और पानीपत में एक तीर्थ शामिल हैं।
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सभी तीर्थों पर की जा रही तैयारी : छाबड़ा
तीर्थ निगरानी कमेटी के अध्यक्ष एवं केडीबी के मानद सचिव रहे मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि इस बार सभी तीर्थों पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाएगा, जिसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। सभी तीर्थों पर रंगाई पुताई से लेकर अन्य कार्य पूरे किए जा रहे हैं। यहां गीता पाठ होगा तो अष्टादश श्लोकाच्चारण, हवन यज्ञ व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी कराए जाएंगे। सभी तीर्थों पर दीये भी जलाए जाएंगे।
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