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डॉक्टरों ने की दो घंटे की हड़ताल, मरीज हुए परेशान

Wed, 07 Sep 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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डॉक्टरों का इंतजार करते मरीज। - फोटो : Amar Ujala
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हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर पूरे हरियाणा में मंगलवार को डॉक्टरों ने दो घंटे की हड़ताल की। लेकिन इन दो घंटों की कलम छोड़ हड़ताल से ही सिविल अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई। मरीजों को यहां खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खास कर बाहर से आए मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। शहर के अलावा जिले के अन्य कस्बों में भी सीएचसी और पीएचसी पर भी मरीजों को इलाज के लिए दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि इमरजेंसी और गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय सेवाएं जरूर मिली।
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 जिला अस्पताल में चिकित्सक सुबह 8 बजे से 10 बजे तक और प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस दौरान केवल आपातकालीन मरीजों और प्रसव के लिए आई महिलाओं का इलाज किया गया। आउट डोर का काम पूरी तरह से दो घंटे तक ठप रहा। डॉक्टरों ने काम रोक कर सरकार के खिलाफ डॉक्टर विरोधी नीतियों का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन किया गया।

दो घंटे ज्यादा किया काम
हालांकि डॉक्टरों ने शुरू के दो घंटे काम नहीं किया लेकिन बाद में दो घंटे ज्यादा काम करके मरीजों को इलाज मुुहैैया कराया। इधर शहर के लोगों को डॉक्टरों की हड़ताल का पता था, ऐसे में स्थानीय मरीज दो घंटे बाद ही अस्पताल में पहुंचे। लेकिन बाहर से आए ज्यादातर मरीजों को हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं होने से वे सुबह से ही अस्पताल में पहुंच गए। ऐेसे मरीजों को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा तब कहीं जाकर डॉक्टरों को दिखा पाए।
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इन मांगों को लेकर की हड़ताल
हड़ताल के दौरान सभी डॉक्टर पहले जिला प्रशिक्षण केंद्र पर इकट्ठा हुए। यहां डॉक्टरों ने अपनी मांगों पर चर्चा की। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र खामरा ने बताया कि डॉक्टरों की मुख्य मांगे स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को विशेष वेतन पैकेज मुहैया कराना, उन्हें उनकी स्पेशिलिटी का कार्य करने देना, सामान्य चिकित्साधिकारी को भी विशेष वेतन देना, केंद्र सरकार की तर्ज पर वेतनमान एवं पदोन्नति, डॉक्टरों की पोस्ट ग्रेजुएशन पॉलिसी ठीक करने, पोस्टमार्टम या मेडिको लीगल कार्य भत्ता देना, कार्यस्थल पर डॉक्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करना, सभी डॉक्टरों का समाज में आर्थिक और सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करना, केंद्र सरकार की तरह रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करना हैं। इन मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। लेकिन अब तक इन मांगों पर कोई सुनवाई नहीं है।

मीटिंग के दौरान जिले के सभी चिकित्साधिकारी, उप सिविल सर्जन और  स्पेशलिस्ट डॉक्टर  शामिल हुए। दो घंटे की हड़ताल के बाद सुबह 10 बजे जिला अस्पतालों में और 11 बजे सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज शुरू हो पाया।
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