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ग्रीन बेल्ट खत्म होने से लगातार बढ़ रहा सेक्टरों का तापमान

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सेक्टरों में ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले इन दिनों तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया जा रहा है। इस अंतर के जिम्मेदार सेक्टरवासी ही हैं। सेक्टर में ग्रीन बेल्ट नष्ट हो चुकी है, जिस कारण सेक्टरों का एक्यूआई लेवल भी ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा रहने लगा। वीरवार को दोपहर 12 बजे सेक्टर सात में तापमान मापा गया तो 43/26 डिग्री सेल्सियस था, वहीं शहर से करीब 14 किलोमीटर दूर जाकर गांव उमरी में यह 40/26 डिग्री दर्ज किया गया।
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वहीं नए बस अड्डे के सामने एक्यूआई लेवल दोपहर दो बजे 128 दर्ज किया गया, जोकि संवेदनशील लोगों को बीमार कर सकता है, इसी समय बस अड्डा से 10 किलोमीटर दूर गांव खेड़ी मारकंडा में यह लेवल 105 था, जोकि सामान्य है। गांव और शहर में इस अंतर को खत्म करने के लिए शहर में अधिक से अधिक पेड़ लगाने की जरूरत है, लेकिन ग्रीन बेल्ट में सरेआम पेड़ काटे जा रहे हैं और पार्क बनाकर कब्जों का खेल जारी है। ऐसा नहीं कि अधिकारी इन सब बातों से अनजान हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आंखें मूंदे हुए हैं। ग्रीन बेल्ट की हालत बेहद खराब हो गई है। कई जगह तो बेल्ट कूड़ा डंपिंग स्थल का रूप ले चुकी है। बात करें सेक्टर-7 या आठ की तो यहां बेल्ट से हरियाली बिल्कुल साफ है और दूर तक करीब आधा किलोमीटर के एरिया में बेल्ट के अंदर कूड़ा फैला हुआ है। इसके अलावा बाकी कसर लोगों ने बेल्ट पर कब्जे कर निकाल दी है। हर कोई ग्रीन बेल्ट की जगह का अपने हिसाब से प्रयोग कर रहा है। कई लोगों ने तो पक्के निर्माण तक कर लिए हैं और इस जगह को स्टैंड के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। बाकायदा, ग्रिल या तार लगा कर कई जगह पर कब्जा कर लिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि इन्हीं सेक्टरों में अधिकारियों के निवास हैं। रोजाना अधिकारी इसी ग्रीन बेल्ट के पास से होकर गुजरते हैं, लेकिन इस ओर आज तक किसी का ध्यान नहीं गया।
वीरवार को स्थिति जांची तो पाया कि सेक्टर सात में 100 फुटा रोड पर करीब ढाई किलोमीटर की ग्रीन बेल्ट में सेक्टरवासियों द्वारा 10 पार्क व 7 पार्किंग बनाई गई हैं। वहीं बागवानी के पास तो इसे कूड़ा डंपिंग जोन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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सेक्टर तीन वासी शिवांग दत्त शर्मा ने कहा कि सेक्टरों में गांव या कॉलोनी के मुकाबले पहले ही पेड़ पौधे कम होते हैं। इसलिए यहां ग्रीन बेल्ट बनाई जाती है, ताकि सेक्टर हरा भरा दिखे और बेल्ट में लगे पेड़ पौधों से पर्यावरण शुद्ध हो सके, लेकिन सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट तो बिल्कुल खत्म हो चुकी है। यह सब अधिकारियों की अनदेखी के कारण हुआ है। जिन्होंने ग्रीन बेल्ट पर कब्जे किए हुए हैं उनके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चहिए।
एचएसवीपी के बागवानी विभाग के एसडीओ नरोती राम ने कहा कि ग्रीन बेल्ट को लेकर एस्टीमेट बनाकर भेजा हुआ है। कुछ दिनों पहले ही ग्रीन बेल्ट की सफाई भी कराई थी। वहीं जिन्होंने ग्रीन बेल्ट पर कब्जे किए हुए हैं उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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