The structure of education will change as soon as the new education policy is implemented
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कुरुक्षेत्र। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स आदि सभी विषय एक-दूसरे से जुड़ने जा रहे हैं। अब विज्ञान की पढ़ाई करने वाला विद्यार्थी सामाजिक विज्ञान से जुड़े किसी पाठ्यक्रम को भी अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ सकेगा। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स आदि के मिले जुले विषय पढ़कर विद्यार्थी अपने ज्ञान और स्किल को निखारने का अवसर प्राप्त करेगा, लेकिन सभी विषयों के संगम वाली इस पढ़ाई के लिए शिक्षकों को बहुत अच्छे से तैयार होना होगा।
उक्त विचार वीरवार को जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित विशेष व्याख्यान में आईआईएचएस की प्रो. अनिता दुआ ने व्यक्त किए। प्रो. दुआ ने कहा कि अब नई शिक्षा नीति लागू होते ही पढ़ने-पढ़ाने का पूरा ढांचा ही बदला जाएगा। शिक्षकों और विद्यार्थियों को सब कुछ नए तरीके से सोचना होगा, तभी वह इसके लिए तैयार हो पाएंगे। उन्होंने शिक्षकों को बताया कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य है कि विद्यार्थियों में अधिक से अधिक स्किल बढ़े और वो अधिक से अधिक प्रैक्टिकल कार्य करें। इसके लिए पाठ्यक्रम बनाना अपने आप में बहुत जिम्मेदारी भरा और चुनौती भरा कार्य होगा।
यह भी सत्य है कि यह बहुत ही रुचिकर कार्य भी होगा। एक शिक्षक को अपने विषय के कोर्स के साथ अन्य विषयों के विद्यार्थियों के लिए भी कोर्स डिजाइन करने होंगे। स्नातक पाठ्यक्रम इस तरह तैयार करने होंगे कि अगर कोई विद्यार्थी नई शिक्षा नीति के अंतर्गत निर्धारित ग्रेजुएशन के चार साल से पहले भी कोर्स छोड़ना चाहे, तो उसे हम एक सर्टिफिकेट कोर्स दे सकें। इसमें विद्यार्थियों के पास चार वर्षीय पाठ्यक्रम को किसी स्तर पर छोड़कर जाने और फिर उसमें दोबारा लौटने के बहु विकल्प होंगे। कोर्सों का अंतिम वर्ष बाहर इंडस्ट्री में इंटर्नशिप को ही लगभग समर्पित रहेगा लेकिन शिक्षक और विद्यार्थी एक दूसरे से जुड़े रहेंगे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिकिंग) बढ़ाना नई शिक्षा नीति के प्रमुख ध्येय में से एक है। इस अवसर पर संस्थान की निदेशिक प्रो. बिंदु शर्मा व डॉ. मधुदीप सहित अन्य उपस्थित रहीं।