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Kurukshetra News: साधकों ने की शंख प्रक्षालन और नेति की शुद्ध क्रियाएं

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कुरुक्षेत्र। योगाश्रम मिर्जापुर में शंख प्रक्षालन क्रिया के लिए योगासन करते कार्यकर्ता। विज्ञ​प
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कुरुक्षेत्र। भारतीय योग संस्थान की ओर से कार्यकर्ताओं को शंख प्रक्षालन क्रिया कराई गई। शनिवार को सूक्ष्म क्रियाओं, ओम ध्वनि व गायत्री मंत्र उच्चारण का अभ्यास कराया गया। विशेषज्ञाें ने शंख प्रक्षालन के लाभ, निषेध, सावधानियां और सही विधि के बारे में साधकों को विस्तार से जानकारी दी।
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संरक्षक हरिराम जोशी ने साधकों को शंख प्रक्षालन के विशेष पांच आसनों का विधिपूर्वक अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि ये वे सदस्य थे, जोकि कुछ दिन पहले एकादशी व्रत के कारण क्रिया नहीं कर पाए थे। इसीलिए रविवार को पुन: योगाश्रम मिर्जापुर पहुंचे। इस दौरान 26 साधक, जबकि 10 कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रांतीय प्रधान ओमप्रकाश ने शंख प्रक्षालन का महत्व बताया। साधकों ने शंख प्रक्षालन के बाद कुंजल, रबड़ और सूत्र नेति और जल नेति आदि शुद्ध क्रियाएं की। शंख प्रक्षालन के बाद 30 मिनट का शवासन और मानसिक शांति व निष्काम सेवा भाव के बारे में बताया। साधकों को देसी घी की स्वादिष्ट खिचड़ी परोसी गई। इस अवसर पर प्रेस प्रवक्ता गुलशन ग्रोवर, जिलाध्यक्ष मनीराम सैनी, उपप्रधान सेवा सिंह, जोन प्रधान मिथिलेश चौधरी, मांगेराम, सुशीला, सत्येंद्र तोमर, रविंद्र छौकर और राजेंद्र सहित कई जिलों के कार्यकर्ताओं ने सहयोग दिया।
शंख का अर्थ आंतें और प्रक्षालन का अर्थ धोना
ग्रोवर ने बताया कि शंख का अर्थ है पेट या आंतें और प्रक्षालन का अर्थ है धोना। क्रिया से अंत: वाहिनी नली कंठ से गुदा तक शुद्ध हो जाती है। शंख प्रक्षालन क्रिया वर्ष में केवल दो बार बदलते मौसम में ही की जा सकती है। यह एक ऐसी यौगिक शुद्धि क्रिया है जिसमें पानी पीकर कुछ सरल से योगासनों के पांच-पांच चेट किए जाते हैं। पांच बार इस क्रम को दोहराकर मल निष्कासन के लिए शौचालय जाया जाता है। यही क्रिया पांच से छह बार की जाती है। पहली बार शौच जाने पर सामान्य मल निकलता है, दूसरी-तीसरी बार कुछ पतला और अंत में स्वच्छ पानी जैसा मल निकलता है तो क्रिया संपन्न हो जाती है। इस क्रिया से पेट के रोग, फेफड़े, वात-पित्त-कफ, गर्मी से होने वाले, सर्दी-जुकाम, नेत्र संबंधी विकार व सिर दर्द इत्यादि रोग ठीक होते हैं। आंतों की कमजोरी, आंतों में सूजन, गंभीर हृदय रोगी, उच्च रक्तचाप के रोगी और अल्सर के रोगी को शंख प्रक्षालन क्रिया नहीं करनी चाहिए।

कुरुक्षेत्र। योगाश्रम मिर्जापुर में शंख प्रक्षालन क्रिया के लिए योगासन करते कार्यकर्ता। विज्ञप

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