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Kurukshetra News: नशे का बढ़ रहा प्रचलन, खात्मे के लिए करने होंगे सार्थक प्रयास

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कुरुक्षेत्र। अब भी नहीं जागे तो नशे के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़नी होगी। आजादी की लड़ाई में दुश्मन हमारे सामने था, मगर यह दुश्मन तो अप्रत्यक्ष रूप से हमलावर है। हालांकि इससे लड़ने के लिए हमारे पास सरकारी तंत्र है, मगर उसमें कई कमियां भी है। इससे लड़ने और तोड़ने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। हमें नशे के बढ़े प्रचलन को तोड़ना होगा, जिसके लिए सार्थक प्रयास जरूरी है।
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इसी को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से नशा मुक्त हरियाणा-चुनौतियां और समाधान विषय पर संवाद कराया गया। शुक्रवार को हरियाणा गुरुद्वारा सिख मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के मुख्य कार्यालय में हुए संवाद में अधिवक्ता, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक, समाजसेवी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इसमें नशे को रोकने, कार्रवाई, सामाजिक जिम्मेदारी और अन्य महत्वपूर्ण साधनों पर मंथन किया गया।



प्रत्येक जिले में अलग से बने अस्पताल : डॉ. मंढाण
एलएनजेपी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण ने बताया कि नशा करना सस्ता है, मगर उसका उपचार काफी महंगा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी नशे की गर्त में फंसे हुए हैं। उपचार और सही मार्गदर्शन न मिलने से कई युवा दम तोड़ देते हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में अलग से 100 से 200 बेड का अस्पताल होना जरूरी है। साथ ही फंड की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
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पुलिस प्रशासन के पास कर्मियों की कमी : रोशन लाल
पुलिस प्रवक्ता रहे उपनिरीक्षक रोशन लाल ने बताया कि पुलिस प्रशासन नशे के खिलाफ पुख्ता और बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है। तस्करों को पकड़ने के साथ उनकी संपत्ति को भी कुर्क किया जाने लगा है। हालांकि पुलिस विभाग के पास कर्मियों की कमी है। विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करने के साथ युवाओं को नशे के खिलाफ और खेलों के प्रति जागरूक कर रहा है। तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस के अलावा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अलग से काम कर रहा है।



मिलीभगत के मामले भी आ रहे सामने : पीसी तायल
अधिवक्ता प्रेम चंद तायल ने बताया कि पुलिस विभाग नशा तस्करों पर कार्रवाई कर रहा है, लेकिन तस्करों के पुलिस से मिलीभगत के मामले भी सामने आते हैं। कई बार पुलिस की ढीली कार्रवाई का फायदा उठाकर नशा तस्कर खुद को बचाने में कामयाब हो जाते हैं। पुलिस के डर से कई लोग सूचना देने तक से कतराते हैं। कई लोग पुलिस के सवाल-जवाब की वजह से किसी मामले में पड़ने से बचते हैं। पुलिस को आमजन को भरोसा दिलाकर अपना सूचना तंत्र मजबूत करना चाहिए।



बच्चों के साथ बिताना चाहिए समय : जितेंद्र सिंह
समाजसेवी जितेंद्र सिंह शैंटी ने बताया कि सब लोग मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े हैं। इस पर परोसी जा रही सामग्री हर उम्र के लोग ग्रहण कर रहे हैं, मगर माता-पिता का फर्ज बनता है कि अपने बच्चों को सही सामग्री से अवगत कराए। उनके साथ समय व्यतीत करें। उन पर अनावश्यक बोझ न डालें। उनकी सुनने के साथ उनको सही और गलत के बारे में समझाना बेहद जरूरी है।



गली-मोहल्ले में छोटी-छोटी दुकान पर बिक रहा नशा : जय नारायण
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जय नारायण शर्मा ने बताया कि शहर में गली-मोहल्ले की छोटी-छोटी दुकानों पर नशा बिक रहा है। तस्कर बड़े स्तर की बजाय छोटे स्तर पर नशा उपलब्ध कराने लगे हैं, जिससे युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है। इससे बचने के लिए सामाजिक अभियान चलाना होगा। प्रत्येक समाज अपने समाज के युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करे। ये प्रत्येक समाज की जिम्मेदारी भी है।



युवा वर्ग रील को समझ रहा रियल : कविता
अधिवक्ता कविता विद्रोही ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली (स्टेटस सिंबल) युवाओं को प्रभावित कर रहा है। फिल्म व सोशल मीडिया पर चल रही रील को युवावर्ग रियल समझ रहा है। युवावर्ग रुतबा दिखाने के शौक में नशे और धूम्रपान की ओर आकर्षित हो रहा है। साथ ही नशा तस्कर युवा वर्ग का ब्रेन वॉश कर रहे हैं। यहां तक कि कॉलेज की छात्राएं और कई महिलाएं नशे को अपनी अमीरी और आधुनिकता से जोड़ कर गर्त में जा रही हैं।



सिस्टम को होना होगा सख्त : सुदेश कुमारी
जन संघर्ष मंच की महासचिव एवं अधिवक्ता सुदेश कुमारी ने बताया कि हमारा शासन और प्रशासन काफी लचर है। शासन और प्रशासन को नशे के खिलाफ सख्त होना ही पड़ेगा। किसी की आवाज दबाने की बजाय प्रशासन को उसकी आवाज बनकर कार्रवाई करनी चाहिए। प्रशासन को नशे की चेन को तोड़ना होगा। उसके लिए छोटे नहीं बल्कि नशे के बड़े कारोबारी पर कार्रवाई करनी होगी। प्रशासन इस सब से बच नहीं सकता है।




जानना होगा संस्कृति, सभ्यता और धार्मिकता का महत्व : ग्रेवाल
समाजसेवी लखविंद्र सिंह ग्रेवाल ने बताया कि हम अपनी संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक महत्व को अपने बच्चों तक पहुंचाने में कमजोर साबित हो रहे हैं। इस कारण बच्चे आसानी से किसी के बहकावे में आकर नशे की लत में फंस जाते हैं। हमें अपने बच्चों को बचपन से ही संस्कार देने होंगे। हमें बच्चों के हाथों मजबूर नहीं होना है, बल्कि उनको सही रास्ता दिखाना है।
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