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Kurukshetra News: सचखंड श्री हजूर साहिब की तीर्थ यात्रा संपन्न, नांदेड़ साहिब से तीर्थ यात्रियों का जत्था वापस रवाना

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कुरुक्षेत्र। यात्रा के दौरान यात्री। ​सूचना विभाग 
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कुरुक्षेत्र। तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब की छह दिवसीय मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा श्रद्धा के साथ संपन्न हो गई। प्रदेश के नौ जिलों से आए 800 से अधिक श्रद्धालुओं ने सचखंड सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों के दर्शन कर गुरु परंपरा से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त करने के बाद तीर्थ यात्रियों का जत्था शनिवार को नांदेड़ साहिब से वापस रवाना हुआ और रविवार को निर्धारित समय अनुसार कुरुक्षेत्र पहुंचेगा।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 5 मई को इस यात्रा को रवाना किया था। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु गोबिंद सिंह की तपोभूमि, पवित्र गोदावरी नदी, गुरुद्वारा हीरा घाट साहिब, मालटेकड़ी साहिब, गुरुद्वारा संगत साहिब और बाबा बंदा सिंह बहादुर से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों में माथा टेका। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारों के इतिहास और उनसे जुड़ी परंपराओं को भी करीब से जाना।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डाॅ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार रही। उन्होंने कहा कि पहली बार कई श्रद्धालुओं को गुरुओं की तपोभूमि और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने का अवसर मिला।
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बादशाह बहादुर शाह यहां गुरु जी के दर्शन के लिए आया : रनवंत कौर
लाडवा निवासी श्रद्धालु रनवंत कौर ने कहा कि इस दर्शनीय यात्रा में बादशाह बहादर शाह यहां गुरु जी के दर्शन के लिए आया तो एक मूल्यवान हीरा सत्कार से गुरु जी को भेंट किया, जो गुरु जी ने तुच्छ समझकर साथ में बह रही गोदावरी नदी में फेंक दिया। बहादुर शाह बड़ा हैरान हो गया कि मैंने तो बहुत ही श्रद्धा से यह मूल्यवान हीरा गुरु जी को भेंट किया है, पर इन्हें हीरों की कदर नहीं की। इसके बाद जब बहादुर शाह ने नदी में झांक कर देखा तो एक हीरा नहीं बल्कि उसके भेंट किए हुए हीरे से भी कई ज्यादा मूल्यवान और कीमती हीरे नदी में मौजूद मिले।
गुरु महाराज जब नांदेड़ शहर में पहली बार आए, तो इसी स्थान पर लगाया था डेरा : सतपाल शर्मा
श्रद्धालु सतपाल शर्मा ने कहा कि यह गुरुद्वारा संगत साहिब है। दशमेश पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज जब नांदेड़ शहर में पहली बार आए, तो सबसे पहले इसी स्थान पर डेरा लगाया था। उनके साथ जो फौज आई उन्होंने गुरु साहिब से मांग की कि हमें वापस घर जाना है, हमें तनख्वाह दो। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने आपने साथ आए पंज प्यारे सिंह को हुकम दिए कि श्री गुरु नानक देवजी के समय का गुप्त खजाना, जो माल टेकड़ी स्थान पर रखा हुआ है, वह खजाना निकाल कर ले आओ, तो उन्होंने खजाने को निकाल कर खच्चरों, बैल गाड़ियां आदि में भरकर इस स्थान पर ले आए और इस स्थान पर खजाने का ढेर लगा दिया। जो पैदल सिपाही था उसे महाराज ने एक ढाल भर कर और जो घुडसवार था उसे दो-दो ढाला भर के खजाना तकसीम किए।

कुरुक्षेत्र। यात्रा के दौरान यात्री। सूचना विभाग 

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