फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kurukshetra News: हाथ में फावड़ा, सिर पर टोकरी रख बदल दी तस्वीर

विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। सदाचार स्थल का बाहरी दृश्य।संवाद
विज्ञापन
...ऐसी विभूति, जिसने हाथ में फावड़ा व सिर पर उठाई टोकरी और बदल दी कुरुक्षेत्र की तस्वीर
विज्ञापन

भविष्य में दिल्ली स्थित राजघाट की तर्ज पर नंदा जी के स्मारक को स्थापित करने की है योजना : उपेंद्र सिंघल
आधुनिक कुरुक्षेत्र के संस्थापक स्व़ गुलजारी लाल नंदा को सोमवती अमावस्या पर कीचड़ के पानी में करना पड़ा था स्नान
स्व़ गुलजारी लाल नंदा जी की 126वीं जयंती पर विशेष
सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या पर कीचड़ के पानी में स्नान करना पड़ा तो मन व्यथित हो उठा। फिर क्या था हाथ में फावड़ा लिया तो सिर पर टोकरी उठा ली। यह कार सेवा देख पीछे पूरा कारवां चल पड़ा। न केवल पवित्र ब्रह्मसरोवर की पूरे एशिया में पहचान बनी बल्कि पूरे कुरुक्षेत्र की ही तस्वीर बदल दी।
यह सार्थक प्रयास था स्व़ गुलजारी लाल नंदा का, जिनके प्रयासों ने बदलाव की ऐसी बयार लाई कि आज धर्मनगरी पर्यटन के रूप में बड़ा कदम बढ़ा चुकी है तो वहीं पूरा विश्व इसे देखने को लायलित है। इन्हीं के प्रयासों से आज उन्हें आधुनिक कुरुक्षेत्र के निर्माता कहा जाता है। दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रह चुके नंदा जी को लोग आज भी उसी तरह याद करते हैं और यह चर्चा आम है कि आज वे होते तो कुरुक्षेत्र कुछ की तस्वीर कुछ और ही होती।
विज्ञापन

गुलजारी लाल नंदा भले ही चार जुलाई 1898 को सियालकोट जिला के गुजरावालां मंडल के गांव बड़ों की गोसाईं में जन्में, लेकिन उनकी मुख्य कर्मभूमि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र ही रही। स्व. गुलजारी लाल नंदा कैथल लोकसभा सीट से 1967 में चुनाव जीते थे। उस वक्त कुरुक्षेत्र कैथल लोकसभा के अंतर्गत आता था। नंदा जी कुरुक्षेत्र में सोमवती अमावस्या पर आए थे। पवित्र ब्रह्मसरोवर पर स्नान करने गए तो यहां तालाब में कीचड़ था। उन्होंने कीचड़ केे पानी में स्नान कर तालाब को सुधारने का संकल्प लिया और इस दिशा में काम शुरू किया।
तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए 1968 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया और वे 1990 तक बोर्ड के अध्यक्ष रहे। इस दौरान कुरुक्षेत्र के तीर्थ स्थलों को सुधारने के लिए अहम कदम उठाते हुए 48 कोस कुरुक्षेत्र के रूप में पहचान दी। वर्तमान में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अंतर्गत 182 तीर्थ स्थल आते हैं। जिस तालाब के जीर्णोद्धार के लिए नंदा जी ने खुद अपने सिर पर टोकरी उठाई आज वह सौ से भी अधिक एकड़ में फैला है। इसकी परिक्रमा डेढ़ किलोमीटर लंबी और आधा किलोमीटर चौड़ी है। यहीं हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाता है।
आयुर्वेदिक कॉलेज बन गया श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय
नंदा जी ने न केवल तीर्थाटन को बढ़ावा दिया बल्कि अध्यात्मक और वैदिक तौर पर ज्ञान को बढ़ावा दिया। उन्होंने ही 20 सितंबर 1972 को सन्निहित सरोवर के तट पर श्रीकृष्ण आयुर्वदिक कॉलेज की स्थापना की थी। यही संस्थान आज प्रदेश का एकमात्र आयुष विश्वविद्यालय बन गया है। गुलजारी लाल ने ही श्रीकृष्ण संग्रहालय को भी स्थापित किया था। यह संग्रहालय माना जाता है। उन्होंने ज्योतिसर तीर्थ को भी विकसित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।



समाज के विकास के लिए ये रहे नंदा जी की ओर से स्थापित संगठन
नवजीवन संघ
मानव धर्म मिशन
मानव धर्म परिषद
मानव विकास योजना
भारतीय लोकमंच
भारतीय सनातन महाबीर दल
भारतीय संस्कृतिक रक्षा संस्थान
अखिल भारतीय युवा परिषद
अखिल भारतीय साधु समाज
भारत सेवा समाज
1997 में मिला था भारत रत्न, 1998 में निधन
गुलजारी लाल नंदा का जन्म सियालकोट, पाकिस्तान में हुआ था। 1921 में असहयोग आंदोलन में भाग लिया और दिल्ली आकर बस गए। वे मुंबई विधानसभा में 1937 से 1939 और 1947 से 1950 तक विधायक रहे। वे 1950-1951, 1952-1953 और 1960-1963 में योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। वे पहले पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद 27 मई 1964 से नौ जून 1964 और फिर 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 तक लाल बहादुर शास्त्री के देहांत के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे। देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न (1997) और दूसरा सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्म विभूषण प्रदान किया गया। 15 जनवरी 1998 को उनका निधन हो गया।

नंदा जी के सपने को साकार करने के प्रयास जारी : उपेंद्र
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि नंदा जी महान विभूति थे। केडीबी ही नहीं आज का कुरुक्षेत्र उनकी ही देन है। उनका प्रयास था कि तीर्थों के साथ-साथ कुरुक्षेत्र का पर्यटन व शिक्षा की दृष्टि से भी विकास हो। आज उसी दिशा में भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। सन्निहित और ब्रह्मसरोवर के समीप उनका स्मारक स्थल है तो साथ ही उनके जीवन दर्शन के लिए केंद्र भी स्थापित किया गया है।
विज्ञापन

अब इस केंद्र में नंदा जी पर समय-समय पर सेमिनार और अन्य कार्यक्रम कराए जाने की योजना तैयार की है, जिसके लिए विशेक्ष कक्ष स्थापित कर दिया गया है। भविष्य में दिल्ली स्थित राजघाट की तर्ज पर नंदा जी के स्मारक को स्थापित किया जाएगा। धर्मनगरी में आने वाली हर बड़ी शख्सियत श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद करेगी, इस दिशा में प्रयास जारी है।

कुरुक्षेत्र। सदाचार स्थल का बाहरी दृश्य।संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें