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Kurukshetra News: प्रशासन की लापरवाही पड़ गई भारी, बारिश में भीगा लाखों क्विंटल गेहूं

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कुरुक्षेत्र। आखिरकार जिसका डर था वही हुआ। प्रशासन की लापरवाही के चलते अनाजमंडियों में पहुंचा गेहूं बारिश की भेंट चढ़ गया। मौसम वैज्ञानिकों की मौसम में बदलाव की चेतावनी के बावजूद भी प्रशासन नहीं जागा और बुधवार को हुई बारिश में जहां जिला भर में लाखों क्विंटल गेहूं भीग गया तो वहीं थानेसर अनाजमंडी में ही हजारों कट्टे बारिश के जमा हुए पानी में डूब गए। गेहूं की यह हालत देख किसान व आढ़ती भी चिंतित है जबकि अगले चार दिन तक मौसम खराब रहने की आशंका जताई जा रही है।
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मंगलवार मध्य रात से मौसम बदला तो अल सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे किसानों व आढ़तियों में चिंता बढ़ गई। दिन में धूप निकलने से कुछ राहत महसूस की, लेकिन शाम करीब पांच बजे अचानक मौसम बदला और बारिश हुई। जिसमें जिले की अनाजमंडियों व खरीद केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे पड़ा गेहूं भीग गया। बारिश का सबसे ज्यादा असर थानेसर क्षेत्र में दिखा, जहां अनाजमंडी में हजारों गेहूं के कट्टे बारिश के पानी में डूब गए। हालांकि गनीमत रही कि बारिश कुछ देर बाद ही रुक गई, लेकिन देर रात तक आसमान में बादल छाए रहे। बारिश के चलते मंडियों में एकाएक ही खरीद भी रुक गई तो वहीं आगे भी मौसम खराब रहने की आशंका से किसान चिंता में डूबे हुए हैं।

थानेसर अनाजमंडी में उठान के इंतजार में है पांच लाख क्विंटल गेहूं
बता दें कि मंगलवार तक थानेसर अनाजमंडी में 10 लाख क्विंटल से ज्यादा गेहूं की आवक हो चुकी है और एजेंसियां सात लाख 47 हजार क्विंटल गेहूं की अब तक खरीद कर पाई हैं। इसमें से भी उठान महज दो लाख 70 हजार क्विंटल गेहूं का हो पाया है। अभी भी करीब पांच लाख क्विंटल गेहूं उठान के लिए पड़ा है। इसमें से अधिकतर गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। हालांकि बारिश आई तो आढ़तियों ने गेहूं की ढेरियों व कट्टों को ढांपने का प्रयास किया, लेकिन अधिकतर गेहूं बारिश में भीगता रहा। यहां तक कि मंडी में सफाई व्यवस्था न होने के चलते फड़ों के आसपास पानी भर गया, जिसमें हजारों कट्टे गेहूं डूब गया।
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किसान व आढ़ती लगाते रहे गुहार, नहीं जागा प्रशासन
एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो गई तो वहीं पांच अप्रैल के बाद आवक भी तेज होने लगी थी, इसके बावजूद उठान कार्य 12 अप्रैल से शुरू किया गया, लेकिन उस समय तक मंडियां उठान न होने के चलते जाम हो चुकी थी। थानेसर में भी मंडी में जगह न बचने पर ब्रह्मसरोवर के आसपास अस्थायी मंडियां बनानी पड़ीं तो अनेक जगहों पर सड़कों व आसपास कच्ची जमीन पर भी किसान गेहूं डालने को मजबूर हुए। किसान से लेकर आढ़ती भी जिला उपायुक्त से लेकर मंडलायुक्त व अन्य उच्चाधिकारियों के समक्ष उठान तेज करवाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन हर कोई महज भरोसा ही देता रहा और उठान कछुआ चाल से ही चलाया गया। किसान व आढ़तियों का कहना है कि प्रशासन समय पर जाग जाता तो बारिश में इतना गेहूं भीगने से बच जाता। अभी चार दिन और बारिश का मौसम रहने के आसार है। इस नुकसान का कौन जिम्मेदार होगा।

सचिव बोले, अभी नुकसान नहीं
मार्केट सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि आज बारिश हल्की ही रही है और अभी नुकसान नहीं। बारिश आगे भी जारी रही तो नुकसान अवश्य होगा। पानी में डूबे गेहूं के कट्टों को हटा लिया जाएगा।
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