कुरुक्षेत्र। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में महासचिव पद को लेकर करीब एक माह पहले हुई रार आखिरकार खत्म हो गई है। अब महासचिव पद पर गुरविंद्र सिंह धमीजा पहले की तरह काम करेंगे जबकि मोहनजीत सिंह संयुक्त सचिव रहेंगे। यह रार चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास पर करीब पांच घंटे तक चली बैठक में खत्म हो पाई, जिसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों को एकजुटता का पाठ भी पढ़ाया, वहीं सभी से मिलकर सिख संस्थानों के विकास कार्यो को गति देने का भी आह्वान किया।
गुरविंद्र सिंह धमीजा पर गंभीर आरोप लगाए गए थे तो कमेटी की आपात बैठक कर उनकी जगह संयुक्त सचिव मोहनजीत सिंह पानीपत को महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। हालांकि गुरविंद्र सिंह धमीजा अभी तक दावा करते रहे कि वे ही महासचिव हैं, लेकिन यह रार थमने का नाम नहीं ले रही थी। मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल तक पहुंचा तो गत मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर कमेटी की मुख्यमंत्री के साथ अहम बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने कार्यकारिणी के सभी सदस्यों के साथ एक-एक कर चर्चा की। बाद में उन्होंने संयुक्त रूप से बैठक में कहा कि कमेटी को आपसी एकता बनाए रखनी होगी ताकि संबंधित संस्थानों का बेहतर विकास हो सके।
21 को पानीपत में होगी बैठक
इसी बैठक में ही निर्णय लिया गया कि कमेटी की 21 जून को पानीपत में अहम बैठक होगी, जिसमें कमेटी की ओर से किए जा रहे कार्यों को और तेज करने पर चर्चा की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक में भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल शामिल होंगे। वहीं, करनाल के सांसद संजय भाटिया के अलावा कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी व सदस्य भी शामिल होंगे।
कमेटी पहले की तरह बेहतर कार्य करेगी
गुरविंद्र सिंह धमीजा का कहना है कि उनको लेकर कुछ गलतफहमी थी, जो दूर हो गई है। मुख्यमंत्री के साथ हुई अहम व लंबी बैठक के बाद सभी पदाधिकारी व सदस्य अब मिलकर कार्यो को आगे बढ़ाएंगे। कमेटी पहले की तरह बेहतर कार्य करेगी। मुख्यमंत्री के साथ बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में बैठक हुई और सभी सदस्यों व पदाधिकारयों ने मुख्यमंत्री के साथ लंच भी किया।
महंत बोले, महासचिव पद से नहीं हटाए थे धमीजा
कमेटी के प्रधान महंत करमजीत सिंह का कहना है कि गुरविंद्र सिंह धमीजा को महासचिव पद से नहीं हटाया गया था बल्कि उनकी पावर मोहनजीत सिंह को दी गई थी। अब पहले की तरह सभी पदाधिकारी व सदस्य कार्य करेंगे।