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Kurukshetra News: केयू में नहीं थम रहा कुंटिया विवाद, राजवंत कौर बोलीं- मैं ही प्रधान

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कुरुक्षेत्र। कुंटिया कार्यालय। संवाद
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में गैर शिक्षक कर्मचारी संघ कुंटिया का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। एक समय ही पर दो लोग कुंटिया प्रधान होने का दावा कर रहे हैं, साथ ही एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर चला हुआ है। वहीं राजवंत कौर ने खुद को कुंटिया की वैध प्रधान बताते हुए सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है, वहीं दूसरी ओर नीलकंठ शर्मा गुट का कहना है कि नई कार्यकारिणी का गठन हो चुका है और पुराने पदाधिकारी अब नए लोगों को कार्यभार सौंप रहे हैं, जिसके चलते इस्तीफे हो रहे हैं।
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एक बार फिर राजवंत कौर ने कहा कि वह ही कुंटिया की निर्वाचित प्रधान हैं, जबकि दूसरे लोग मात्र एक ग्रुप के प्रधान हैं। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े मौजूदा विवाद को लेकर सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। बैठक में उन कर्मचारियों को लेकर चर्चा होगी जिनकी भूमिका संगठन में पैदा हुए विवाद के पीछे मानी जा रही है, साथ ही बैठक में आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सकता है, वहीं नीलकंठ शर्मा ने कहा कि अब तक करीब-करीब 10 से 15 सदस्य अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें महासचिव रविंद्र तोमर, सहसचिव मनीष बाल्दा और प्रेस सचिव जगदीप सिंह समेत ईसी सदस्यों के इस्तीफे शामिल हैं। नीलकंठ शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि राजवंत कौर कार्यकाल पूरा होने के बाद भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन किया जा चुका है और अब संगठन का कामकाज नई टीम के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
कुंटिया में समानांतर नेतृत्व के दावों के बीच अब कर्मचारियों की नजर सोमवार को होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद संगठन के भीतर चल रहे विवाद को लेकर अगली रणनीति और कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
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अब तक क्या हुआ
- कुंटिया में दो गुट आमने-सामने आए।
- राजवंत कौर खुद को निर्वाचित प्रधान बता रही हैं।
- नीलकंठ शर्मा नई कार्यकारिणी के प्रधान होने का दावा कर रहे हैं।
- महासचिव रविंद्र तोमर, सहसचिव मनीष बाल्दा और प्रेस सचिव जगदीप सिंह पद छोड़ चुके हैं।
- सोमवार को बुलाई गई बैठक में विवाद के जिम्मेदार कर्मचारियों पर चर्चा होगी।
- नई और पुरानी कार्यकारिणी के दावों से संगठन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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