कुरुक्षेत्र। शांति नगर में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ शांति कुंज भवन नजदीक दुर्गा माता मंदिर में कलश यात्रा और मंगलाचरण के साथ हुआ। सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन करते हुए नगर भ्रमण किया। जगह-जगह फूलों की वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।
कथा के प्रथम दिन प्रमुख समाजसेवी प.रामराज कौशिक ने व्यास पीठ का पूजन क़र आशीर्वाद लिया। कथा स्थल पर व्यासपीठ पर आसीन कथावाचक पूज्य तेजस गुरु ने गणेश वंदना, गुरु वंदना एवं व्यास पूजन के उपरांत गो माता का वंदन करके कथा का आरंभ किया। उन्होंने श्रोताओं को श्रीमदभागवत महापुराण की महिमा सुनाते हुए कहा कि यह ग्रंथ कलियुग में मनुष्य को धर्म, भक्ति और मोक्ष का मार्ग दिखाने वाला दिव्य प्रकाश स्तंभ है। राजा परीक्षित–शुकदेव महाराज प्रसंग का प्रारंभ पहले दिन कथा में बताया गया कि किस प्रकार राजा परीक्षित को अपने जीवन के केवल सात दिन शेष होने का ज्ञान हुआ और उन्होंने गंगा तट पर शुकदेव से भागवत श्रवण का संकल्प लिया।