जिले का आदर्श गांव ज्योतिसर, थानेसर विधायक सुभाष सुधा का गोद लिया गांव ज्योतिसर, लेकिन इस गांव में विकास की ज्योति बड़ी ही मद्धम है। न प्रशासन को यहां किसी सरकारी योजना के तहत काम करते देखा जा सकता है और न ही विधायक ही इसकी सुध लेते हैं। स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि सरकारी दस्तावेजों में आदर्श गांव का रूतबा रखने वाला यह गांव बीमारी का घर बनता जा रहा है। जगह जगह कूड़े के ढ़ेर, गंदे पानी का ठहराव, मच्छरों की भरमार कच्ची सड़क, बरसाती पानी के निकास की कोई व्यवस्था नहीं यह सब इस आदर्श गांव की पहचान बनते जा रहे हैं। न स्वास्थ्य महकमे की टीम ने कभी यहां सही तरीके से झांक कर देखा, न गांव की पंचायत ने यहां कचरे के ढ़ेर देखे...। प्रशासन को भी यहां कभी कुछ खामियां नजर आई। ऐसे में अब लोगों ने भी इस गांव के विकास की उम्मीद छोड़ दी है। दिलचस्प बात यह है कि विधायक सुधा का दावा है कि गांव के विकास के लिए अब तक दो करोड़ रुपये की घोषणाएं की जा चुकी है, लेकिन इन घोषणाओं पर अमलीजामा कब पहनाया जाएगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट -
गांव ज्योतिसर को आदर्श गांव का दर्जा मिला हुआ है। विधायक सुभाष सुधा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना के तहत इस गांव के विकास का जिम्मा लिया था और इसे गोद लिया था। लेकिन गांव के लोगों को आरोप है कि यहां विधायक यहां आते जरूर है, लेकिन गोद लिए गांव की हैसियत से कभी इस काम में कोई बड़ा काम आज तक नहीं हुआ। जो घोषणाएं की गई थी वह भी अब तक पूरी नहीं हुई।
मच्छरों की भरमार
गांव में कई जगह ऐसी है जहां जल भराव की स्थिति रहती है। बरसाती पानी के अलावा लोगों के घरों से निकाला पानी भी कई जगह जमा होता रहता है। यह हमेशा ही रहता है, जिससे इस पानी में मच्छरों की भरमार हो चुकी है। कई निजी खाली प्लाट भी जलभराव का कारण बने हुए हैं। यहां भी मच्छरों की भरमार है। गांव में बने स्कूल के सामने भी मच्छरों की भरमार से विद्यार्थी और शिक्षक स्टाफ परेशान है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लार्वा मिलने पर कई लोगों को नोटिस थमाए लेकिन यहां इस लिहाज से झांक कर भी नहीं देखा।
रिहायशी इलाके में फेंके जाते हैं मृत पशु
गांव में मृत पशुओं की खाल निकाल कर श्मशान घाट के पीछे खुले में ही फेंक दिए जाते थे। लेकिन इस स्थान पर पंचायत ने गरीब लोगों को सौ-सौ गज के प्लाट वितरित कर दिए थे। कई लोगों ने यहां मकान भी बना लिए हैं। लेकिन मृत पशुओं की खाल निकाल कर ढांचा अभी भी यहीं फेंका जा रहा है। जबकि यह रिहायशी इलाका हो चुका है। लोगों ने इसकी शिकायत कई बार पंचायत और फिर डीसी तक को की, लेकिन अभी तक इससे निजात नहीं मिल पाई है। ऐसे में इन मृत पशुओं से भी बीमारी फेलने का अंदेशा बना हुआ है। इन पशुओं को खाने के बाद गांव के श्वान (कुत्ते ) भी एक बार पागल हो चुके हैं। एक ने तो कई लोगों और दुधारू पशुओं को काट भी लिया था।
जगह जगह कचरे का ढ़ेर
गांव में जगह जगह कचरों का ढ़ेर लगा हुआ है। यहां कचरा उठाने के लिए कोई माकूल इंतजाम नहीं है। मुख्य गली के पास ही कचरे का ढ़ेर लगा हुआ है। गांव वालों की माने तो पिछले कई वर्षों से यहां से कचरा ही नहीं उठाया गया। जिससे पूरा गांव अब कचरे के ढ़ेर में बदलता जा रहा है। गंदगी से बीमारी फैलने का भी अंदेशा बना हुआ है।
मुख्य गली ही पक्की नहीं
गांव की मुख्य गली, जहां सती माता का मंदिर भी और यही गली गांव को मुख्य सड़क से जोड़ती है। लेकिन कई बार घोषणाएं होने के बाद भी आज तक यह पक्की नहीं बन पाई। ऐसा नहीं है कि इसे पक्की बनाने के प्रयास नहीं हुए, लेकिन यह प्रयास कभी भी सिरे नहीं चढ़े।
घोषणा के बाद भी नहीं बन पाई चारदीवारी
विधायक सुधा ने दो वर्ष पहले गांव की सरकारी स्कूल की चार दीवारी बनाने की घोषणा की थी। स्कूल के कमरे भी जर्जर हालत में थे। विधायक ने इस पर अफसोस भी जताया था और स्कूल की चार दीवारी बनाने सहित अन्य सुविधाएं जुटाने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक स्कूल की चारदीवारी तक नहीं बन पाई है। इसे लेकर गांव के लोगों ने कई बार गुस्सा भी जाहिर किया है, लेकिन काम नहीं हुआ।
गांव की परेशानी, लोगों की जुबानी
छात्रा मनीषा ने बताया कि सरकारी स्कूल के चारों और पानी भरा हुआ है। जिस कारण कक्षाओं पढ़ाई करना तो दूर बैढना भी कठिन है। मच्छरों और मक्खियों के कारण पढ़ाई कर पाना कठिन हो गया है।
ज्योतिसर निवासी शैलेंद्र पाल ने बताया कि विधायक सुभाष सुधा ने गांव को गोद तो ले लिया, लेकिन उसकी सुध लेना भूल गए। गांव में जगह-जगह गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं। नालियों की सफाई न होने से खाली पड़े प्लाटों में पानी जमा हो गया है। जिस कारण बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने भी कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। गांव में जगह-जगह पानी और गंदगी फैली हुई है। लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा।
मुलतान खान ने बताया कि सरकार द्वारा सफाई अभियान पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन विधायक के गोद लिए गांव में सफाई के नाम पर कुछ भी नहीं है। गांव की मुख्य सड़कों पर पशु बांधे हुए हैं। चारों ओर गंदगी का माहौल है। गांव की मुख्य गलियों में भी सफाई व्यवस्था नहीं है। लोगों के आपसी विवाद के चलते गलियों का निर्माण तक नहीं हुआ है। जिस कारण हल्की-सी बरसात में गलियों से निकल पाना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों, अभिभावकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व पंच सुरजबान ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले सरकारी स्कूल में जर्जर हो चुके कमरों को तोडा गया था। जिस ठेकेदार को कमरे तोडने का ठेका दिया गया था वह ठेकेदार स्कूल की मिट्टी जेसीबी से उठाने लगा था, हमने विरोध तो काम रोक कर चला गया। इसके बाद कभी यहां काम नहीं हुआ। मिट्टी की खुदाई से जो गड्ढे बने थे वह आज भी है। इन्हें भरने का काम तक नहीं हुआ। बरसात होते ही यहां पानी भर जाता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बच्चों को झेलना पड़ता है।
गांव के ही रमेश ने बताया कि पंचायत द्वारा गांव में सफाई के लिए कर्मचारी लगाए हुए हैं। लेकिन ये कर्मचारी कभी भी सफाई के लिए गलियों में नहीं जाते। जिस कारण चारों ओर गंदगी फैली हुई है। लोग मजबूर होकर नालियों की सफाई खुद करते हैं। गांव में श्मशान घाट तक जाने वाली गली तक पक्की नहीं है। इस गली में पिछले करीब 3 वर्ष से पुलिया टूटी हुई है जिस कारण वहां से पैदल तक निकलने में परेशानी होती है। जब किसी की मौत हो जाती है तो अंतिम संस्कार के लिए जा रहे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। श्मशान घाट से आगे खेत है फसल कटाई के समय किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कभी भी जलभराव मिलेगी तो कार्रवाई
यदि किसी प्लाट पर जलभराव है उस प्लाट के मालिक को नोटिस दिया जाएगा। दवाई का छिड़काव किया जाएगा, जिससे मच्छर पैदा न हो। कभी भी जल भराव मिलेगा, कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. केके शर्मा, नोडल अधिकारी डेंगू मलेरिया रोकथाम
गांव में कई समस्याएं हैं, यह बात सही है। लेकिन गांव की आमदनी भी नहीं है। अभी तक पंचायतों को ग्रांट भी नहीं मिली। काम के लिए पैसों की जरूरत होती है। गांव की परेशानियों के लिए विधायक और सीएम को मांग पत्र दिया है। जैसे ही ग्रांट मिलेगी विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। अभी भी स्कूल के पास जो जलभराव की स्थिति थी उससे पार पाने के लिए साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से सीवेज का काम शुरू कराया है। कुछ बड़े काम हैं, जिनके लिए बड़ी रकम की जरूरत है। इसकी डिमांड सरकार को भेज दी है। सफाई के लिए चार कर्मचारी लगाए गए हैं, लेकिन दो तो काम ही नहीं करते। पंचायत का इन पर कोई जोर नहीं है। राशि के अभाव में भी हमने कई जगह पाइप लाइन डलवाई है, तीन रास्तों को पक्का कराया है। गांव की दो गलियों को भी पक्का कराया गया है।
-बीना देवी, सरपंच, ज्योतिसर
पानी निकासी के लिए दिया एक करोड़
गांव के विकास के लिए अलग अलग एक-एक करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। पानी निकासी के लिए भी एक करोड़ रुपये दिया गया है। जल्द ही 50 करोड़ की लागत से ज्योतिसर में 11 एकड़ जमीन पर महाभारत की थीम पर पार्क बनाया जाएगा। ज्योतिसर को ऐसा बना देंगे कि दुनिया देखेगी। बड़े काम हैं, वक्त लगता है। धीरे धीरे सारे काम होंगे। सुभाष सुधा, विधायक थानेसर