होम गार्ड के एक जवान ने महिला थाना के पास जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। उसके पास से चार पेज का एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने पिपली पुलिस थाना के एक एएसआई व दो अन्य लोगों पर एक मामले की तफ्तीश से लौटते समय मारपीट व जलील करने का आरोप लगाया है। नई पॉकेट डायरी में लिखे सुसाइड नोट में मृतक ने एएसआई विजेंद्र, तेजवीर, सेक्टर सात चौंकी इंचार्ज महेंद्र व दो अन्य लड़कों को जिम्मेदार बताया है।
साथ ही पिता को लिखा है कि उसकी बेटी दानवी अभी छोटी है, बड़ी हो तो उसे आईपीएस बनाना, ताकि इस प्रकार के थानेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सके। फिलहाल पुलिस ने पुलिस एएसआई विजेंद्र सिंह समेत तीन व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
गांव ऊंचा समाना, जिला करनाल निवासी राहुल उर्फ बंटी (बंटी) होमगार्ड में भर्ती हुआ था। पिछले कई दिनों से वह थाना पिपली में तैनात था। इससे पहले वह लगभग 6 माह तक सेक्टर 7 स्थित पुलिस चौकी में भी तैनात रहा। उसके पिता जसबीर सिंह भी पुलिस में एएसआई हैं।
राहुल वीरवार को पिपली थाने में तैनात एएसआई विजेंद्र सिंह के साथ गाड़ी में सवार होकर एक मामले में तफ्तीश के लिए गया था। वहां से लौटते ही उसे सायं को महिला पुलिस थाना के पास जहरीला पदार्थ निगल लिया। बाद में उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे डाक्टरों ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परिजन राहुल को शहर के एक निजी अस्पताल में ले गए। उपचार के दौरान शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई।
मोबाइल फोन से बिगड़ी बात
मृतक राहुल के पिता जसबीर सिंह ने पुलिस में दी शिकायत में कहा कि वीरवार को राहुल सदर थाना पिपली में डयूटी पर था। लगभग 4 बजे उसे एसआई विजेंद्र सिंह किसी केस के सिलसिले में कहीं लेकर गया। उस दौरान उसके साथ दो अन्य लोग भी गाड़ी में सवार थे। तफ्तीश के बाद लौट रहे थे कि राहुल ने गाड़ी में बैठे एक व्यक्ति का मोबाइल फोन ले लिया। उससे गाने लोड करने के लिए उसका मैमोरी कार्ड ले लिया और फोन लौटा दिया। आरोप है कि एएसआई व अन्य दोनों उसे चोर कहने लगे। उसने चोरी से इंकार किया तो राहुल के मारपीट व गाली-गलौच की गई। उसे होमगार्ड से निकलवाने व जान से मारने की भी धमकी दी। आरोप है कि राहुल ने इससे आहत होकर महिला थाना के समीप जहरीला पदार्थ खा लिया। बाद में उसकी मौत हो गई।
...पिता जी मै जीना नहीं चाहता
एसडीएम सतबीर कुंडू की कोर्ट में नायब के तौर पर तैनात मृतक के पिता एएसआई जसबीर सिंह ने बताया कि राहुल का लगभग सात बजे फोन आया था। उसने बताया कि पिता जी मैं बहुत तंग आ चुका हूं, मुझे बहुत टार्चर किया गया है। अब मैं जीना नहीं चाहता। इस समय मैं महिला थाना के समीप हूं और आत्महत्या कर रहा हूं। वह फोन सुनते ही महिला थाना के समीप पहुंचे तो राहुल बेहोशी जैसी हालत में पड़ा था।
सिटी थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि वे अस्पताल में राहुल के बयान लेने पहुंचे थे, लेकिन बयान देने से पहले ही उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता के बयान पर आरोपी एएसआई विजेंद्र सिंह व दो अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी मिलेगा, उसे भी इसमें शामिल किया जाएगा।
मैं मम्मी के पास जा रहा हूं
राहुल अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। शादीशुदा था और तीन साल की बेटी दानवी का पिता था। उसकी मां की पहले ही मौत हो चुकी है। मृतक राहुल की जेब से नई पॉकेट डायरी मिली है। जिसमें उसने सिर्फ सुसाइड नोट लिखा है। इसमें लिखा है कि उसके नाम जो भी जमीन आदि है उसे दानवी व एक रिश्तेदार बेटे वीनी दोनों को दें दें। मैं अपनी मम्मी के पास जा रहा हूं, मेरा कोई नहीं है।
...साहब होमगार्ड जवानों को पुलिस करती है प्रताड़ित : कमांडर
होमगार्ड के प्लाटून कमांडर एसआई प्रताप सिंह सूचना के अस्पताल पहुंचे। उनके साथ होमगार्ड जवान सतपाल सिंह, सुलतान, सत्यनारायण आदि थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मी उन्हें प्रताड़ित करते हैं। उनके साथ गाली गलौच करते हैं। सभी चौक व चौराहों पर कोई भी पुलिस कर्मी खड़ा होकर डयूटी नहीं देता और होमगार्ड जवान ही खड़े रहते है।
ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए उन पर ही दबाव डाला जाता है। जो लोग उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं, पुलिस कर्मी खड़े-खड़े देखते रहते हैं। ऐसे ही कई वाक्या उन्होंने अपने मोबाइल फोन में भी रिकार्ड किए हुए हैं। उधर प्लाटून कमांडर प्रताप सिंह ने बताया कि उनके पास कई बार होमगार्ड जवानों की शिकायतें आ चुकी हैं। पुलिस कर्मी इन जवानों को मामूली समझते हैं और उन्हें मानसिक तौर पर भी परेशान किया जाता है।
ऐसे ही व्यवहार के चलते राहुल को अपनी जान गंवानी पड़ी। वह पुलिस कर्मियों की इस प्रकार की मनमानी व दुर्व्यवहार को लेकर एसपी व डीजीपी होमगार्ड को भी शिकायत भेजेंगे। राहुल के बारे में भी उच्चाधिकारियों को पूरी जानकारी दी है। उधर सिटी थाना के एसएचओ राजेश कुमार ने बताया कि इस प्रकार के आरोप तो लगाए जाते हैं, लेकिन सभी पुलिसकर्मी ऐसा व्यवहार नहीं रखते।