कुरुक्षेत्र। वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए गांव मथाना के अमर बलिदानी सरदार बलवंत सिंह को शिक्षा विभाग ने सम्मान दिया है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मथाना का नाम बदलकर शहीद बलवंत सिंह राजकीय विद्यालय कर दिया गया। करीब दो महीने पहले नाम में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसकी सूचना स्कूल प्रशासन, एमआईएस पोर्टल और ग्राम पंचायत तक भी पहुंच चुकी है।
शहीद के सुपुत्र व रोडवेज से सेवानिवृत्त निरीक्षक मनजीत सिंह ने बताया कि उनके पिता सरदार बलवंत सिंह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऑपरेशन के दौरान देश की रक्षा करते हुए 9 दिसंबर को जेएंडके तंगदार बॉर्डर पर सीधी लड़ाई में शहादत को प्राप्त हो गए थे। उनकी उम्र लगभग 25 वर्ष थी। अचानक हुए हमले में लड़ते हुए उनकी पूरी सिख बटालियन शहीद हो गई थी। शहादत को सरकारी स्तर पर विद्यालय के नाम से जोड़कर सम्मानित किया जाना परिवार के लिए सम्मानजनक बात है। ग्रामीणों ने भी इस फैसले पर खुशी जताई। संवाद
शहीद के नाम से स्कूल होना सम्मान की बात : योगेश
प्राचार्य योगेश कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से प्रेरणादायक कदम उठाया गया है। शिक्षा से जुड़े पोर्टल पर स्कूल का नाम बदल दिया गया। शहीद बलवंत सिंह के नाम से विद्यालय का नाम जुड़ना ग्रामीणों के साथ शिक्षकों के लिए भी गर्व का विषय है।
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शहीद का सम्मान मथाना के लिए गौरव की बात : रवि टिंका
मथाना के रवि टिंका ने कहा कि वर्ष 1971 के युद्ध में हवलदार बलवंत सिंह ने देश की रक्षा में अपना जीवन न्योछावर कर दिया था। उनके नाम पर सरकारी स्कूल होना पूरे गांव के लिए गौरवान्वित क्षण है। ग्राम पंचायत की ओर से स्कूल के नए नाम का बोर्ड जल्द ही लगाया जाएगा।
वीरांगना को गुजर बसर के लिए मिले थे तीन हजार : मनजीत
शहीद के पुत्र मनजीत सिंह ने बताया कि वीरगति प्राप्ति के बाद उनकी वीरांगना सुरजीत कौर को सम्मान के रूप में गुजर बसर के लिए तीन हजार रुपये, एक सिलाई मशीन और कपड़े व प्रेस करने वाली स्त्री दी गई थी। आगे सहायता के आश्वासन मिलते रहे, लेकिन कोई सुध नहीं ली। वीरांगना को तीन बच्चों के पालन-पोषण में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार से भरसक सहायता की उम्मीद थी, जिसकी टीस अभी तक बनी हुई है।
कुरुक्षेत्र। मथाना के शहीद बलवंत सिंह।- फोटो : Archive