कुरुक्षेत्र। अमीन रोड स्थित जय ओंकार आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन हुआ। इस दौरान स्वामी शक्तिदेव कुरड़ी वाले और स्वामी संतोष ओंकार कुरड़ी वालों ने संगत को सद्गुरु की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि सद्गुरु निराकार परब्रह्म ओंकार भगवान का साकार रूप हैं। परमात्मा ही इस संसार का ज्ञान कराता है।
सत्संग में बताया गया कि यह संसार एक मुसाफिरखाना है। यहां राजा हो या भिखारी, सभी को अपने कर्म करके जीवन यात्रा पूरी करनी है। जो जीव सद्गुरु नाम का कीर्तन-जाप करता है, वह बिना कष्ट के गुरु चरणों में विलीन हो जाता है। ऐसे लोग अपना जीवन आनंद में व्यतीत करते हैं। मनुष्य को इस नश्वर संसार में गुरु नाम का जाप करना चाहिए। बिना गुरु के गति नहीं होती और ओंकार भगवान की कृपा भी प्राप्त नहीं की जा सकती। गुरुदेव के माध्यम से ही कृपा प्राप्त होती है। संघ संचालक पंडित शिवनारायण दीक्षित ने भी सद्गुरु को निराकार परब्रह्म ओंकार भगवान का साक्षात स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलकर जीवन यापन करना चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचनों का आनंद लिया।