कुरुक्षेत्र। लोहड़ी पर्व पंजाब और हरियाणा की लोक-संस्कृति की आत्मा माना जाता है। यह केवल आग के चारों ओर गीत-संगीत और खुशियों का त्योहार नहीं बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है। खासकर जब किसी महिला की ससुराल में पहली लोहड़ी होती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
यह दिन नई बहू के लिए अपनत्व, सम्मान और परिवार में स्वीकार किए जाने का प्रतीक बन जाता है। पहली लोहड़ी पर परिवार की ओर से बहू को नए वस्त्र, गहने, मिठाइयां और शुभाशीष दिए जाते हैं।
ससुराल की पहली लोहड़ी दिल के बेहद करीब : सुमन
सुमन ने बताया कि मायके में लोहड़ी हर साल धूमधाम से मनती थी लेकिन ससुराल की पहली लोहड़ी का उत्साह अलग ही है। परिवार का प्यार और परंपराओं में शामिल होना उन्हें खास एहसास कराएगा। इसके लिए तैयारियां भी की जा रही हैं।
पहली लोहड़ी से रिश्तों में घुलती है मिठास : दीक्षा
दीक्षा का कहना है कि पहली लोहड़ी परिवार की संस्कृति से जोड़ती है। गीत-संगीत, हंसी-खुशी और बड़ों का आशीर्वाद इस दिन को नई शुरुआत का प्रतीक बना देता है। ससुराल की पहली लोहड़ी वास्तव में रिश्तों की गर्माहट और नई जीवन की मधुर शुरुआत का पर्व है।
कुरुक्षेत्र। सुमन।