कुरुक्षेत्र। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के चुनाव का बिगुल बज चुका है। छह मार्च को होने वाला यह चुनाव हरियाणा के साथ-साथ पंजाब के सिख नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनेगा। यह पहला मौका होगा जब प्रदेश के सिख अपनी स्थायी कमेटी का चुनाव करेंगे। चुनाव के लिए पूरे प्रदेश को 40 वार्डों में बांटा गया है।
हालांकि कमेटी की चौधर को लेकर प्रदेश के सिख अलग-अलग गुटों में बंटे हैं, जिनके बीच जमकर खींचतान रही है तो अब तक एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए जाते रहे हैं। इसी के चलते यह खींचतान इन चुनावों में भी देखने को मिल सकती है। भले ही अभी अलग कमेटी के लिए संघर्ष करने वाले सिखों को एकजुट किए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन सिख नेता अपने-अपने स्तर पर चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं। वहीं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी भी हरियाणा की अलग कमेटी के बाद से फिर सक्रिय है और प्रधान एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी भी बैठक कर रणनीति बना चुके हैं तो वहीं धर्मनगरी में मिशन कार्यालय तक खोला गया। वहीं शिरोमणि अकाली दल बादल भी हरियाणा कमेटी के चुनावों में पूरी तैयारी के साथ ताल ठोंकने का एलान कर चुका है। अब हरियाणा कमेटी में किसे चौधर मिल पाएगी, यह चुनाव परिणामों के बाद ही पता चल पाएगा।
नलवी तय कर चुके 17 उम्मीदवार
दीदार सिंह नलवी चुनाव लड़ने के लिए सिख समाज संस्था का गठन कर 17 उम्मीदवारों के नाम तक तय कर चुके हैं तो वहीं वे सभी 40 हलकों में चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। भूपिंद्र सिंह असंध की अगुवाई में चल रही एडहॉक कमेटी लगातार उनके निशाने पर है। उनका कहना है कि कमेटी के होने वाले चुनावों में प्रदेश की संगत उनके संगठन की ओर से उतारे जाने वाले उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताएगी।
पंथक अकाली दल के नाम से पार्टी बना चुके झींडा
हरियाणा एडहॉक कमेटी के सबसे पहले प्रधान रह चुके जगदीश सिंह झींडा भी पंथक अकाली दल के नाम से अपनी पार्टी बना चुके हैं, जिसके बैनर तले ही उम्मीदवार तय किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी पार्टी का निशान चढ़ता सूरज होगा। चुनाव के लिए पूरी रणनीति तय कर ली गई है। उन्हें पूरा भरोसा है कि उनके उम्मीदवार ही सभी वार्डाें में विजयी होंगे।
चुनाव लड़वाने का करेंगे काम : भूपिंद्र
एचएसजीएमसी की गत 11 सितंबर से कमान संभाल रहे भूपिंद्र सिंह असंध का कहना है कि यह पहला मौका होगा जब प्रदेश के सिखों की अपनी कमेटी बनाएंगे। उन्हें पूरा यकीन है कि प्रदेश की सिख संगत सही उम्मीदवारों को चुनकर एक बेहतर कमेटी बनाएगी, जो गुरुघरों का सही रूप संचालन करेगी। चुनाव में उनकी क्या भूमिका रहेगी, इस पर चुप्पी साधते हुए कहा कि वे चुनाव लड़वाने का काम करेंगे।
प्रधान बदले, लेकिन नहीं ली जा सकी गुरुघरों संस्थानों की संभाल
बता दें कि 21 दिसंबर 2022 को महंत कर्मजीत सिंह एडहॉक कमेटी के प्रधान चुने गए थे। उसी दिन से विरोध भी शुरू हुआ तो बाद में अंबाला के पंजोखरा साहिब में हुए घटनाक्रम के बाद प्रधान महंत कर्मजीत सिंह व महासचिव गुरविंद्र सिंह धमीजा ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद जत्थेदार भूपिंद्र सिंह असंध को कमेटी की चौधर सौंपी गई तो उन पर भी जमकर आरोप लगते रहे। दीदार सिंह नलवी व जगदीश सिंह झींडा के मुताबिक आज तक यह कमेटी संभी गुरुघरों व संस्थानों की सेवा नहीं संभाल पाई। इनमें कैथल के गढ़ी गुजरान गुरुघर व शाहाबाद का मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज भी शामिल है।
प्रदेश में 52 गुरुघर, सबसे ज्यादा कुरुक्षेत्र में
बताया जाता है कि प्रदेश में 52 गुरुघर हैं, जिनमें सबसे ज्यादा करीब 15 गुरुघर कुरुक्षेत्र में ही है। इसके साथ ही शाहाबाद का मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज व कई अन्य शिक्षण व दूसरे संस्थान भी है। दीदार सिंह नलवी की माने तो आज भी 20 से ज्यादा गुरुघर व अन्य संस्थान हरियाणा कमेटी के अधीन नहीं लिए जा सके हैं।