शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद हमेशा निशाने पर रहती है। हाल ही में विधायक ने खुद पर्ची उठवाकर 31 वार्डों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 40 साल में पहली बार सभी दरोगाओं के क्षेत्र बदले थे। साथ ही अपने-अपने क्षेत्र को स्वच्छ रखने के आदेश भी दिए थे। इतना सब करने के बाद भी शहर के हालात में कोई बदलाव नजर नहीं आया। शनिवार को इन दरोगाओं के क्षेत्र की स्थिति जांची तो वही गंदगी के ढेर जगह-जगह लगे नजर आए। ग्राउंड रिपोर्ट पर देखा तो वार्ड-2, 5, गांधी नगर, वार्ड-12, 15, 17, 21, 27 व 28 सहित अन्य क्षेत्रों में जगह-जगह गंदगी के ढेर शहर की सुंदरता पर धब्बा लगा रही थे। धर्मनगरी पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमकाने के लिए सरकार व प्रशासन करोड़ों रुपये का बजट हर साल खर्च कर ही है, लेकिन शहर की ऐसी हालत इन करोड़ों रुपये पर पानी फेर रही है।
शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से हर साल किए जाने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण में नगर परिषद थानेसर हमेशा पिछड़ती आई है। राष्ट्रीय पर तो दूर की बात आज तक प्रदेश स्तर पर भी टॉप-10 में जगह नहीं बना पाई है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में नप का ऑल इंडिया लेवल पर 203 और स्टेट लेवल पर 12वां स्थान था। वहीं 2020 में ऑल इंडिया में 259 और स्टेट लेवल पर 16 वां । 2019 में 2018 के मुकाबले नप 53 अंक पिछड़ गई थी। अप्रैल तक हुए सर्वेक्षण में 252 रैंक देश भर में व 14वां रैंक प्रदेश स्तर पर प्राप्त किया था। वर्ष 2018 में ऑल इंडिया लेवल पर 199 और 2017 में 253 वां नंबर था। 2022 के परिणाम अगस्त या सितंबर में आ सकते हैं।
बता दें कि शहर के 31 वार्डों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कुल 386 सफाई कर्मचारी हैं, जबकि जरूरत 500 कर्मचारियों की है। मौजूदा कर्मचारियों में 80 तो पक्के हैं, जबकि 306 पे रोल पर हैं। शहर की 65 हजार इकाइयों से रोजाना करीब 80 टन कूड़ा जनरेट होता है, जिसे 386 सफाई कर्मचारियों की ओर से रोजाना उठाना बड़ी चुनौती है।