कुरुक्षेत्र। जिला क्षय एवं कुष्ठ रोग केंद्र।
कुरुक्षेत्र। अब स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगी के संपर्क में आने वाले लोगों को भी सुरक्षा प्रदान करेगा। अधिकतर मामले में रोगी के परिजन ही उसके संपर्क में रहते हैं, जिनको सुरक्षित रखने के लिए विभाग टीपीटी (टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी) का इस्तेमाल करेगा। हालांकि पहले सिर्फ पांच साल तक के बच्चों को ही टीपीटी के अंतर्गत रखा जाता था, मगर देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने के लिए इससे ज्यादा उम्र के लोगों को भी इसमें शामिल किया गया है।
विभाग के मुताबिक जिले में इस साल सात मई तक 2065 लोग टीबी रोगी के संपर्क में आए, जिसमें पांच साल तक के 105 बच्चे शामिल है। इस अवधि के दौरान जिले में 864 टीबी के नए मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि वर्तमान में करीब 1100 रोगी जिला क्षय रोग केंद्र से इलाज करवा रहे हैं। इस अवधि में 18 टीबी रोगियों की मौत भी हो चुकी है। टीबी रोगी के संपर्क में आए लोगों को 12 सप्ताह तक इलाज किया जाता है। इसके तहत उनको सप्ताह में एक बार ही दवा खाने की जरूरत होगी। साथ ही समय-समय पर उनकी जांच भी होती है।
टीपीटी शुरू होने के बाद जिले में रोगी के संपर्क में आने वाले पांच साल तक के बच्चों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसमें 2020 के मुकाबले चार साल के दौरान तीन गुणा ज्यादा वृद्धि हुई है। वहीं इस साल के पहले 138 दिनों में 105 बच्चे टीपीटी के अंतर्गत आ चुके हैं। आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी होना लाजमी है। फिलहाल टीबी उन्मूलन के लिए विभाग टीपीटी के तहत संपर्क में आए लोगों को भी प्रतिरोधी दवाएं उपलब्ध करवा रहा है।
स्क्रीनिंग के बाद दी जाएगी टीपीटी : डॉ. अग्रवाल
जिला क्षय रोग नोडल अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि अगर किसी को फेफड़े की टीबी है तो वह कम से कम 15 लोगों में टीबी फैला सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रोगी के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को टीपीटी के तहत तीन से छह महीने तक प्रतिरोधी दवाएं दी जाएगी। इससे पहले उनकी स्क्रीनिंग की जाएगी, अगर उनमें टीबी के लक्षण नहीं दिखाई देते उनको टीपीटी और लक्षण हुए तो टीबी का उपचार किया जाएगा।