शोरूम में आग लगने की सूचना मिलने पर भले ही फायर ब्रिगेड कर्मी मौके पर पहुंच गए, लेकिन उनके द्वारा जान जोखिम में डाल आग पर काबू पाने के प्रयासों को देख हर कोई दंग रह गया। इस दौरान सरकार और विभाग की भी पोल खुलकर सामने आ गई। जहां विभाग के अधिकारी आग की बड़ी से बड़ी घटना पर भी काबू पाने में समक्ष होने के दावे कर रहे है वहीं शोरूम के बेसमेंट में करीब 20 फीट दूरी के एरिया में आग पर काबू पाने के दौरान कर्मियों को मास्क तक नहीं दिए गए। यहां तक कि दर्जनों की संख्या में महज हेलमेट पहन पहुंचे इन कर्मियों के पास किसी प्रकार के ग्लब्स, जैकेट से लेकर डार्क विजन कैमरे व बैटरी तक नहीं थी।
बैटरी से लेकर डार्क विजन कैमरे तक न होने से जहां ये कर्मी बेसमेंट के अंदर उठे धुएं के गुब्बार के बीच किस हिस्से की ओर आग लगी है, यह तक भी नहीं देख पा रहे थे। यहां तक कि इन कर्मियों के पास हल्की जाली तक काटने के लिए कोई कट्र तक नहीं था। फायर बिग्रेड के हालात इस कदर बदतर बने हुए कि फायर ब्रिगेड गाड़ियों से आधे से ज्यादा पानी सड़क पर ही बहता रहा। फटी पाईपों के सहारे आग बुझाने पहुंचे कर्मी जिन गाड़ियों में आग लगी थी वहां तक प्रेसर न बन पाने के चलते पानी तक नहीं पहुंचा पा रहे थे। जिसके चलते ही आग पर लंबे समय तक काबू नहीं पाया जा सका।
आधा घंटा तक जालियां तोड़ते रहे फायर कर्मी
शोरूम के बेसमेंट में आग लगने के चलते फायर ब्रिगेड कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बेसमेंट में आग लगने पर जहां पूरा बेसमेंट धुएं के गुबार में बदल गया वहीं फायर कर्मियों को यहां कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। यहां तक कि कर्मियों को इसमें पानी की पाईपें भी पहुंचाने का रास्ता नहीं मिल रहा था तो उन्होंने हथौड़ों से करीब आधा घंटा तक जालियां तोड़नी पड़ी। तभी जाकर वे जलती गाड़ियों तक पानी पहुंचाने में सफल हो पाए।
फायर आफिसर का बेतुका बयान
जिला फायर अफसर कृष्ण चंद्र से जब कर्मियों को ऐसी घटनाओं के समय दी जाने वाली सुविधाओं की कमी पर बात की तो उन्होंने बेतुका बयान दिया। उनका कहना था कि यह कर्मी इसी हालात में ही आग बुझाने में सक्षम है। आग बुझाने के लिए मास्क, ग्लब्स व जैकेट की कोई जरूरत नहीं होती। ऐसे में केवल हेलमेट ही काफी है। उधर कई कर्मियों की मानें तो गहरे घुएं के गुब्बार के बीच वह कुछ नहीं देख पा रहे थे तो वहीं ऐेसे में दिवार से लेकर अन्य चीजों में बिजली करंट तक आ सकता है। शोरूम की एक दीवार में आज भी घटना के दौरान हल्का करंट था, लेकिन उनके पास किसी प्रकार ग्लब्स तक नहीं।
गाड़ियां बचाने के प्रयासों में जुटाए कर्मी, शोरूम प्रबंधक पर भड़के नायब तहसीलदार
शोरूम के बेसमेंट में आग लगने के दौरान जहां फायर ब्रिगेड कर्मी उस पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे वहीं शो रूम प्रबंधन ने अनेकों कर्मियों को बेसमेंट मे उतार दिया। ऐसे में दम घुटने से बड़े हादसे की आशंका बन गई, जिस पर मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह भड़क गए। उन्होंने जीएम योगेश बख्शी को लताड़ लगाई और कहा कि ऐसे में किसी भी कर्मी की दम घुटने व किसी कार में ब्लास्ट आदि होने से जान भी जा सकती है। इतने बड़े स्तर पर लापरवाही को लेकर वह कार्रवाई करने को मजबूर होंगे। नायब तहसीलदार के कई बार कहने के बावजूद भी अनेकों कर्मी गाड़ियां बेसमेंट से निकालने में लगे रहे और लताड़ लगाए जाने पर उन्होंने कर्मियों को बेसमेंट से बाहर निकाला।
जान नहीं गाड़ी बचाने का किया प्रयास : चेयरमैन
मौके पर पहुंचे जिला परिषद के चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी ने पत्रकारों को बताया कि प्रबंधन के अधिकारियों ने ऐसे मौके पर कर्मियों की जान नहीं बल्कि गाड़ी बचाने का अधिक प्रयास किया। उन्होंने गंभीर स्थिति में भी बिना किसी मास्क आदि के ही कर्मियों को गाड़ियां निकालने पर लगा दिया, ऐसे में कोई हादसा हो सकता था।