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Kurukshetra News: अदालत ने तारकोल चोरी के आरोपियों को बरी करने के फैसले को रखा बरकरार

Sat, 16 May 2026 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। सेशन जज दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने वर्ष 2016 के चर्चित तारकोल चोरी मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की ओर से आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में विफल रहा।
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पुलिस के अनुसार सूचना के आधार पर शाहाबाद स्थित शुभम एंटरप्राइजेज के पास छापेमारी कर कुछ लोगों को टैंकरों से तारकोल चोरी करते हुए पकड़ा गया था। पुलिस ने मौके से तीन टैंकर, तारकोल के ड्रम, सफेद पाउडर से भरे 109 कट्टे, खाली ड्रम, मोटर, वेल्डिंग सेट और जनरेटर बैटरी बरामद करने का दावा किया था। मामले में मेजर सिंह, रवि झा, विक्रमजीत उर्फ विक्का, राधेश्याम समेत अन्य आरोपियों को नामजद किया गया था। तीन आरोपी पहले ही भगोड़ा घोषित किए जा चुके हैं।
हालांकि ट्रायल कोर्ट ने 28 जुलाई 2022 को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ पुलिस ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी।
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सेशन कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले की जांच करने वाले मुख्य जांच अधिकारी एएसआई फूल सिंह को अभियोजन पक्ष अदालत में पेश नहीं कर सका। अदालत ने इसे अभियोजन की बड़ी कमी माना।
इसके अलावा बरामद सामान को भी ट्रायल के दौरान अदालत में पेश नहीं किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया, जबकि घटनास्थल आबादी वाले क्षेत्र और ढाबे के पास था। पुलिस ने चोरी हुए सामान के मालिक को भी जांच में शामिल नहीं किया और न ही किसी व्यक्ति की ओर से चोरी की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
फैसले में कहा गया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए खुलासा बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक कि उनके समर्थन में स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य मौजूद न हों।
सेशन जज दिनेश कुमार मित्तल ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी आरोपी के बरी होने के बाद उसकी निर्दोषता की धारणा और मजबूत हो जाती है तथा अपीलीय अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब निचली अदालत का फैसला स्पष्ट रूप से गलत या कानून के विपरीत हो। संवाद
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