कुरुक्षेत्र। लोक अदालत में मामलों की सुनवाई के लिए आवेदन देने पहुंच रहे फरियादियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हेल्प डेस्क की औपचारिकता और कर्मचारियों की अनदेखी के कारण वादकारियों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। उन्हें एक डेस्क से दूसरी डेस्क के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं आवेदन पत्र तैयार करवाने के लिए बाहर से 500 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे फरियादियों की जेब ढीली होने के साथ लोक अदालत का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।
लोक अदालत में सबसे अधिक मामले वाहन चालानों और बिजली बिलों से संबंधित हैं। इन मामलों में सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने वाले फरियादियों को हेल्प डेस्क से उचित सहायता नहीं मिल रही। कर्मचारी सही मार्गदर्शन देने के बजाय उन्हें इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर कर रहे हैं। कई फरियादी शिकायत कर रहे हैं कि हेल्प डेस्क केवल औपचारिकता तक सीमित है और उन्हें आवेदन पत्र तैयार करने के लिए बाहर के एजेंटों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इन एजेंटों की ओर से प्रार्थना पत्र के लिए 500 से 1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जो आम लोगों के लिए आर्थिक बोझ बन रहा है।
तीन दिन बाद भी नहीं पता चल पाया की चालान की लोक अदालत में सुनवाई होगी या नहीं
फरियादी अनिल ने बताया कि लोक अदालत में अपने वाहन चालान की सुनवाई के लिए वह मंगलवार को आवेदन करने पहुंचे थे।हेल्प डेस्क से जिला अदालत में संबंधित डेस्क पर भेज दिया। वहां मौजूद कर्मचारी को चालान की कॉपी दी तो कर्मचारी ने उन्हें एक अन्य आवेदन दिखाते हुए बोला कि इस तरह से आवेदन तैयार करवाकर लाओ। बाहर बैठे टाइपिस्ट ने आवेदन तैयार करने के नाम पर 1000 रुपये लिए। इसके बाद कर्मचारी डेस्क पर नहीं मिला।
कर्मचारी वापस आया तो एक मोहर लगाकर बोला चालान शाखा से इसका रिप्लाई लेकर आओ। पुलिस लाइन व अदालत के कर्मचारियों का लंच का समय भी अलग-अलग है, इसके चलते वहां पहुंचा तो चालान खिड़की पर भी कोई नहीं मिला और वहां से रिप्लाई लेकर आया तो अदालत के कर्मचारियों का काम करने का समय समाप्त हो गया।
अगले दिन आया तो फाइल ले ली गई पर पता नहीं चल पाया कि किस न्यायाधीश की अदालत में उनका मामला दिया गया व न ही कोई रसीद दी गई। उसे बोला गया कि कल पता कर लेना की फाइल कहां गई और उसके बाद संबंधित रीडर के पास जाकर अपना टोकन व तारीख का पता कर लेना। अनिल ने बताया कि वह इस तरह तीन दिन से घूम रहा है और उसको अब तक पता नहीं चल पाया है कि उसके चालान की लोक अदालत में सुनवाई होगी यहां नहीं।
डीएलएसए में ज्यादातर हेल्प डेस्क रहता है खाली
जिला वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र में बनाया गया हेल्प डेस्क ज्यादातर समय खाली रहता है। वहां कोई भी उन्हें जानकारी मिल पा रही है। इसके चलते फरियादी निराशा व संकोच के साथ किसी अन्य कर्मचारी से जानकारी से मिलते हैं तो उन्हें भी अनिल की तरह जिला अदालत में आवेदन देने का बोलकर भेज दिया जाता है। केंद्र में फरियादी से आवेदन व प्रार्थना पत्र लेने के लिए कोई सुविधा नहीं है।
फरियादियों की मांग हेल्प डेस्क को प्रभावी बनाया जाए
फरियादियों का कहना है कि लोक अदालत का मकसद त्वरित न्याय प्रदान करना है लेकिन व्यवस्थागत कमियों के कारण यह प्रक्रिया जटिल हो रही है और उन्हें बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिला प्रशासन और अदालत के अधिकारियों से मांग की जा रही है कि हेल्प डेस्क को प्रभावी बनाया जाए और फरियादियों को सही जानकारी व सहायता प्रदान की जाए।
कुरुक्षेत्र। जिला वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र में बनाया गया हेल्प डेस्क दोपहर के समय खाली पड़ा