कुरुक्षेत्र के शहीद मदन लाल ढींगरा पार्क में श्री रामलीला ड्रामाटिक क्लब द्वारा भरत मिलाप और केवट संवाद का मंचन किया गया। मंचन में भरत ने अयोध्या का राजपाठ ठुकराकर श्रीराम की चरण पादुका ग्रहण की। दर्शकों ने इस प्रसंग को सराहा।
कुरुक्षेत्र। श्री रामलीला ड्रामाटिक क्लब की ओर से पुराने बस स्टैंड के नजदीक शहीद मदन लाल ढींगरा पार्क में छठे दिन राम केवट संवाद और भरत मिलाप प्रसंगों का मंचन किया गया। मंचन से पूर्व सभी पदाधिकारियों ने श्रीराम आरती की। मंचन में दिखाया गया कि राजा दशरथ के देहांत के बाद गुरु वशिष्ठ भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलवाते हैं। जब भरत अयोध्या पहुंचे तो पूरी अयोध्या नगरी को शोक में डूबी हुई देखकर उन्हें कुछ शंका हुई। महल पहुंचने पर उन्हें पूरी घटना के बारे में पता चला। जब वे माता कैकेयी के पास पहुंचे और उन्होंने भरत को अयोध्या का राज संभालने को कहा। तब भरत क्रोध में बोले कि मुझे इस अयोध्या का राजा तो क्या अगर तीनों लोकों का राजा भी बनाओगे तो भी मैं ठुकरा दूंगा। तब गुरु वशिष्ठ ने उनको समझाया और पिताजी का अंतिम संस्कार करने के लिए कहा।
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राजा दशरथ के अंतिम संस्कार के बाद गुरु वशिष्ठ भरत को राजपाठ संभालने को कहते हैं। इस पर भरत इन्कार कर देते हैं और तीनों माताओं व अयोध्या की सेना साथ लेकर भगवान राम को मनाने वन को निकलते हैं। भरत को सेना सहित आता देख लक्ष्मण को शंका होती है। तब श्रीराम उन्हें समझाते हैं कि भरत जैसा भाई इस दुनिया में हो ही नहीं सकता। भरत के पहुंचने पर श्री राम उन्हें गले लगा लेते हैं। चित्रकूट में भगवान राम और भरत का मिलाप हुआ। भरत श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या चले जाते हैं।
प्रधान जितेंद्र ललित ने बताया कि रामलीला मंचन में महेंद्र ठाकुर ने भरत, भारत तनेजा ने राम, हर्ष गाबा ने लक्ष्मण, रणजीत ने कैकेयी, सुरेश तनेजा ने केवट, विकास कुमार ने सीता, राहुल ने सुमित्रा और मुकेश अरोड़ा ने शत्रुघ्न, दीपक चोपड़ा ने कौशल्या, कृष्ण लाल वधवा ने कैकेयी, कर्म चंद चुघ ने भरत के मामा और सक्षम ने मंथरा का अभिनय किया।