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Kurukshetra News: खापों का बदलता स्वरूप फैसलों से ज्यादा सामाजिक मार्गदर्शन पर जोर

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कुरुक्षेत्र। उत्तर भारत सर्वखाप महापंचायत एवं चिंतन शिविर में खापों की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव की झलक देखने को मिली। विभिन्न खापों के प्रतिनिधियों और प्रधानों ने स्पष्ट संकेत दिए कि अब खापें केवल फैसले सुनाने वाली संस्थाओं की भूमिका से आगे बढ़कर समाज को सकारात्मक दिशा देने और जनजागरण का माध्यम बनने पर अधिक जोर देंगी।
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चिंतन शिविर के दौरान कई खाप प्रधानों ने माना कि समय बदल चुका है और पारंपरिक फैसलों के प्रभाव में भी कमी आई है। उनका कहना था कि जब समाज उन फैसलों पर पूरी तरह अमल नहीं कर रहा, तब खापों की ऊर्जा को सामाजिक सुधार, जागरूकता और सकारात्मक संवाद में लगाया जाना अधिक जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि खापों का मूल उद्देश्य हमेशा समाज को दिशा देना, भाईचारा बढ़ाना और सामाजिक संतुलन बनाए रखना रहा है।
देशवाल खाप के प्रधान चौधरी संजय देशवाल ने कहा कि बैठक में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि वर्षों से खापों को लेकर समाज के एक वर्ग में कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि खापों के फैसलों को अक्सर तालिबानी या रूढ़िवादी दृष्टिकोण से देखा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। खापें अब इन मिथकों को दूर करने और अपनी सकारात्मक भूमिका को समाज के सामने रखने के लिए व्यापक स्तर पर संवाद अभियान चलाएंगी। देशवाल ने कहा कि शिक्षा, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, महिला सम्मान और युवा नेतृत्व जैसे मुद्दे भविष्य में खापों के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।
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उनका मानना है कि यदि खापें समाज के समकालीन मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाती हैं तो उनकी प्रासंगिकता और स्वीकार्यता दोनों बढ़ेंगी। देशवाल के अनुसार चिंतन शिविर में उभरकर आया संदेश साफ था कि खापें अब केवल निर्णय देने वाली परंपरागत संस्थाओं के रूप में नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, जागरूक करने और सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं। संवाद
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