इस्माईलाबाद। मारकंडा नदी की बाढ़ से प्रभावित धान की फसल। संवाद
इस्माईलाबाद/शाहाबाद। पांच दिनों की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार किसानों ने नैसी गांव से टूटे हुए एक तटबंध को दुरुस्त कर दिया है। इससे खेतों में लगातार हो रहे जलभराव से बड़ी राहत मिली है लेकिन दूसरा तटबंध अभी भी टूटा है, जिस पर बुधवार को भी काम शुरू नहीं हो पाया। यहां से मारकंडा का पानी अभी भी खेतों में मार कर रहा है। किसानों के अनुसार आज इस तटबंध को भी बांध दिया जाएगा।
मारकंडा में बुधवार को पानी का बहाव शाम तक शाहाबाद में 4800 क्यूसेक तक पहुंच गया जिससे बड़ी राहत मिली है लेकिन खेतों में हुए जलभराव से अभी राहत नहीं है। यहां तक कि कई गांव में अभी भी पानी की मार है जहां शिक्षण संस्थान तक नहीं खुल पाए हैं। जलभराव से नष्ट हो चुकी फसल को देख किसानों में मायूसी छा रही है और अनेक सड़कों से भी अभी तक पानी बह रहा है, यहां लोगों की राह मुश्किल बनी हुई है।
बाढ़ के पानी को आगे निकलने में अभी दो से तीन दिन लग सकते हैं। उसके बाद ही नुकसान का सही आंकलन लगाया जा सकता है। अभी तक जिन खेतों से पानी कम हुआ है उनमें धान की फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है। यहां तक कि किसान करीब 40 हजार एकड़ फसल में नुकसान के लिए पोर्टल पर आवेदन दर्ज करवा चुके हैं। जलबेहड़ा हेड पर तैनात गेज रीडर योगेश कुमार के अनुसार गांव जलबेहड़ा में बुधवार दोपहर बाद करीब पांच हजार क्यूसेक पानी बह रहा था। उन्होंने बताया कि सुबह तक मारकंडा नदी का जलस्तर और अधिक कम हो जाएगा। गांव नैसी के सरपंच विरेंद्र शर्मा ने कहा कि गांव के किसानों को हर वर्ष बाढ़ का सामना करना पड़ता है। आज से पहले इतना नुकसान नहीं हुआ था। इस बार मारकंडा नदी में आए उफान से नदी के तटबंध दो जगह से टूट गए थे जिससे फसल शत प्रतिशत खराब हो गई है।
इस्माईलाबाद। मारकंडा नदी की बाढ़ से प्रभावित धान की फसल। संवाद