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अंग्रेजों का बनवाया बल्ला पशु अस्पताल खस्ताहाल

Sat, 30 Apr 2016 12:58 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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अंग्रेजों के कार्यकाल में इलाके के मवेशियों के लिए निर्मित पशु अस्पताल बदहाली का शिकार है। पशुओं के अस्पताल में पशु चिकित्सक का पद पिछले पांच साल से ज्यादा समय से खाली चल रहा है। बल्ला के अलावा राजाबली गोशाला, बल्ला, गांव मानपुरा एवं डेरा पूर्बिया सहित हजारों मवेशियों का इलाज की जिम्मेवारी भी इस अस्पताल पर है।
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गांव के बुजुर्ग रणबीर सिंह मान, राजपाल सिंह, प्रेम सिंह, रामपाल व ओमप्रकाश का कहना है कि अंग्रेजी हुकूमत ने 1921 में बल्ला के अलावा आसपास के गांवों के बीमार पशुओं के इलाज के लिए इस अस्पताल का निर्माण करवाया था। बीमार पशुओं को इलाज के दौरान अस्पताल में ही दाखिल रखने के लिए बाकायदा अलग से पक्का शेड का निर्माण करवाया गया था, जहां पर मवेशियों को एडमिट किया जाता था।

इसके अलावा ऑफिस के लिए दो कमरे, स्टोर रूम बनाए गए थे। बीमार पशुओं पर लगातार पैनी नजर रखी जा सके इसके लिए अस्पताल परिसर में ही चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारियों के लिए रिहायशी क्वाटरों को बनाया गया था। लेकिन 1988 में ऑफिस एवं अन्य बिल्डिंग को संबंधित विभाग की ओर से कंडम घोषित किया जा चुका है। विभाग ने कई वर्ष पूर्व क्वाटर एवं अन्य कमरों को जमींदोज कर दिया लेकिन नए ऑफिस का निर्माण करने की बजाए उस पर करीब एक लाख रुपये की लागत से मरम्मत करवाकर इतिश्री कर ली।
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वर्तमान में आलम यह है कि कार्यालय कभी भी ढह सकता है। अस्पताल का गेट भी काफी समय से टूूटा हुआ है जिसकी मरम्मत विभाग की ओर से नहीं करवाई जा रही है। अस्पताल में पशु चिकित्सक का पद 2011 से खाली चल रहा है। इसका चार्ज सालवन में कार्यरत चिकित्सक का दिया गया है।

ग्रामीण वीरेंद्र कुमार, जसबीर सिंह व सतीश कुमार सहित अन्य का कहना है कि चिकित्सक कब गांव का दौरा करता है इसकी जानकारी ग्रामीणाें को नहीं है। अस्पताल में वीएलडीए मे पद पर कार्यरत कर्मचारी के माध्यम से ही मवेशियों का इलाज किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अन्य जगहों से चिकित्सक बुलाकर पशुओं का इलाज करवाया जा रहा है जो कि उनके लिए बहुत मंहगा साबित हो रहा है। बल्ला गोशाला के संचालक बाबा बलबीर दास का कहना है कि चिकित्सक की कमी के चलते ही गोली गांव में कार्यरत वीएलडीए को गौशाला के मवेशियों के स्वास्थ्य की जिम्मेवारी सौंपी गई है।

इस बारे में विभाग के उप निदेशक, करनाल डॉ. शक्ति सिंह का कहना है कि विभाग में चिकित्सकों की कमी के चलते ही चिकित्सक का पद खाली चल रहा है। भवन निर्माण का एस्टीमेट बनाकर पीडब्ल्यूडी को प्रेषित किया गया है।
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