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Kurukshetra News: नाटक पंचलाइट व गई भैंस पानी का मंचन देख दर्शक हुए लोटपोट

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कुरुक्षेत्र। पंच लाइट के चक्कर में हम तो सुबह से चूल्हा-चौका भी न किए, यही सोचे थे कि पंचलाइट आएगा तो गुजिया बनाकर पूरे टोला को खिलाएंगे। पर अब न पंचलाइट जलेगा न ही गुजिया बनेगी। अब जब तक पंचलाइट नहीं जलेगा, हमरे गले के नीचे तो निवाला भी नहीं उतरेगा। इसी तरह के संवादों के साथ कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने हास्य नाटक पंचलाइट प्रस्तुत कर पंचकूला में चल रहे सरस मेले में दर्शकों को लोटपोट कर दिया। पंचकुला के सेक्टर पांच स्थित परेड ग्राउंड में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, पंचकूला के सौजन्य से एक से 12 मार्च तक सरस मेले का आयोजन किया जा रहा है।
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हरियाणा लोक कला उत्थान ट्रस्ट द्वारा छह मार्च को दो हास्य नाटकों का मंचन करवाया गया। न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप कुरुक्षेत्र के कलाकारों द्वारा विकास शर्मा के निर्देशन में भोजपुरी नाटक पंचलाइट तथा हरियाणवी नाटक गई भैंस पानी में मंचित किये गए। कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन सौरव अत्री द्वारा किया गया।

पंचलाइट नाटक के अंश
फणीश्वरनाथ रेणू द्वारा लिखित कहानी पंचलाइट बिहार के गांव के भोले-भाले लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है। जहां गांव में बिजली न होने के कारण महतो टोली के लोग दंड और जुर्माने के पैसे इकट्ठे करके पंचलाइट खरीद लेते हैं। जब शहर से पंचलाइट गांव में आती है तो खूब खुशियां मनाई जाती हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि गांव के किसी भी व्यक्ति को पंचलाइट जलानी नहीं आती, लेकिन गांव का एक आवारा लड़का गोधन जो पढ़ा लिखा है, उसे ही पंचलाइट जलानी आती है।
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गोधन गांव की ही लड़की मुनरी से प्यार करता था, लेकिन मुनरी से प्यार करने वाले कल्लू को ये अच्छा नहीं लगता और वह मुनरी की अम्मा को सब बता देता है। मुनरी की अम्मा पंचायत बुला लेती है, जिसमें फैसला होता है कि गोधन का हुक्का पानी बंद कर दिया जाए। इस प्रकार गोधन और मुनरी का मिलना जुलना बंद हो जाता है और गोधन को गांव से निकाल दिया जाता है लेकिन पंचलाइट आने पर मुनरी सबको बताती है कि गोधन को ही पंचलाइट जलानी आती है। इज्जत बचाने के चक्कर में सरपंच गोधन को बुलवाकर पंचलाइट जलाने के लिए कहता है, लेकिन गोधन शर्त रखता है कि यदि मुनरी से उसका ब्याह करवाया जाए, तभी वह पंचलाइट जलाएगा। पंचायत उसकी बात मान लेती है और गोधन का मुनरी से ब्याह करवाने का वादा करती है। तब गोधन पंचलाइट जला देता है और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है।


गई भैंस पानी में, के जरिए गुदगुदाए दर्शक



दूसरा नाटक गई भैंस पाणी में मंचित किया गया। विकास शर्मा के लेखन और निर्देशन से सजे नाटक में एक ऐसे परिवार में घटित घटना को दिखाया गया जो लालच में आकर गरीब बनने का ढोंग करते हुए साइबर अपराध के शिकार हो जाते हैं। नत्थू और फुल्लो का बेहद अमीर परिवार है। जिसमें उनके दो बेटे और एक बहन भी साथ रहती है। एक दिन एक साइबर ठग गांव की भोली-भाली जनता को गुमराह करके अमीर बनाने का सपना दिखा देता है। जिसके कारण फुल्लो और उसका परिवार अमीर होते हुए भी गरीब बनने का ढोंग करते है और लालच में फंसकर ठगी का शिकार हो जाते हैं। साइबर ठग उनसे 30 हजार रुपये ठग लेता है। बाद में उसे पुलिस पकड़ लेती है, और नत्थू के परिवार को साइबर अपराध के बारे में सचेत करती है। इस प्रकार हंसी के फव्वारे के साथ कलाकार लोगों को साइबर ठगी से बचने की सलाह देते हैं। नाटक में गौरव दीपक जांगड़ा, निकेता कौशिक, मनू महक माल्यान, शिव कुमार किरमच, चंचल शर्मा, अमरदीप जांगड़ा, विकास शर्मा, अनूप कुमार, सागर शर्मा, राजीव कुमार, पार्थ शर्मा, सुनैना, राजकुमारी, निखिल पारचा, साहिल खान, आकाशदीप, गोविंदा तथा पारितोष ने अपनी प्रतिभा को दिखाया।
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