कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के धरोहर हरियाणा संग्रहालय में पांच दिवसीय फुलझड़ी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें भाग लेने वाले युवाओं ने पारंपरिक फुलझड़ी कला के मूल तत्वों को समझा। संग्रहालय के क्यूरेटर डॉ. कुलदीप आर्य ने फुलझड़ी को हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि फुलझड़ी न केवल लोक उत्सवों और उल्लास का संदेश देती है, बल्कि सौंदर्य व सौहार्द निर्माण की एक दृष्टि भी प्रदान करती है। कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक लोकशैली को युवा पीढ़ी से जोड़ना तथा उन्हें इस अनमोल कला की गहराइयों तक पहुंचाना है।
प्रतिभागियों ने फुलझड़ी निर्माण की तकनीक लकड़ी चयन, काट-छांट, सजावट, रंग संयोजन एवं आकारिकी को सीखा और इसके डिजाइन में अपनी रचनात्मकता को भी सम्मिलित किया। कार्यशाला में युवाओं ने पारंपरिक शैलियों के साथ प्रयोग कर आधुनिक, नवोन्मेषी स्पर्शों को भी अपनाया और फुलझड़ी बनाई।