कुरुक्षेत्र। देश का इकलौता लोक संस्कृति को सहेजने वाला धरोहर यहां अब तक 100 देशों के प्रतिनिधिमंडल से लेकर प्रदेश व देश के चर्चित व्यक्ति पधार चुके हैं। पूरे प्रदेश की संस्कृति को सहजेने वाला, एक हजार लोगों के दान से शुरु होकर आज पूरे विश्व में नाम बनाने वाला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित धरोहर संग्रहालय को 20 साल हो चुके हैं। इसकी स्थापना 28 अप्रैल 2006 को हुई थी। संग्रहालय प्रदेश की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करता है।
धरोहर में करीब 55 सेक्शन हैं। यह कुरुक्षेत्र का ऐसा प्रमुख केंद्र है कि अगर यहां कोई भी वीवीआईपी आता है, तो वह धरोहर अवश्य जाता है। धरोहर में करीब 20 हजार से ज्यादा सांस्कृतिक विरासत की चीजों को सहेज कर रखा गया है। आज भी यहां पुराने हरियाणा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। धरोहर में कूप, माट, चक्की, दादा खेड़ा से लेकर खेती से जुड़े पुराने औजार तक संजोकर रखे गए हैं। प्रदेश के इकलौते परमवीर चक्र विजेता मेजर होशियार सिंह की फोटो से लेकर प्रदेश के वीरता पदक प्राप्त शहीदों की तस्वीरें भी यहां प्रदर्शित की गई हैं।
मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, केंद्र सरकार के मंत्री, राज्यपाल आसिम घोष, पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, सीएम नायाब सैनी से लेकर कई बड़ी हस्तियां यहां आ चुकी हैं। हाल ही में गोयल पुरस्कार के मुख्य अतिथि भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद भी यहां पहुंचे थे।
प्रो. महासिंह पूनिया बताते हैं कि इसकी स्थापना से लेकर अब तक इसका उद्देश्य राज्य की लुप्त हो रही लोक जीवन शैली को प्रदर्शित करना रहा है। इसके पहले चरण की स्थापना 28 अप्रैल 2006 और दूसरे चरण की छह अप्रैल 2013 को की गई थी। उन्होंने बताया कि यहां मौजूद लगभग 90 प्रतिशत कलाकृतियां राज्य के दूर-दराज के गांवों से एकत्र की गई हैं। इस वर्ष संग्रहालय अपना 20वां स्थापना दिवस मना रहा है, जिसके अंतर्गत आज विशेष हवन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। हवन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल सिंह समेत कई शिक्षक शामिल होंगे।
एक हजार लोगों के दान से हुआ शुरु
इसकी शुरुआत के लिए जब गांव-गांव यात्राएं की गईं तब इस सोच को सराहने के लिए उसे आगे बढ़ाने के लिए करीब एक हजार लोगों ने अलग-अलग प्रकार से दान दिया। किसी ने पुराने समय के औजार, किसी ने पुरानी चीजें जो प्रदेश की संस्कृति को दिखाती हैं, तो किसी ने अन्य समान देकर इसकी शुरुआत की। इसको लेकर धरोहर में उन एक हजार लोगों की नाम प्लेट आज भी उनके दान के हिसाब से लगी हुई हैं।
कुरुक्षेत्र। धरोहर संग्रालय कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय। संवाद