कुरुक्षेत्र। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में खींचतान एक बार फिर साफ दिखाई देने लगी है। कमेटी के सदस्य सरदार गुरतेज सिंह की ओर से कमेटी के मुख्यालय पर शुरू किया गया धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसे वरिष्ठ सदस्य सरदार दीदार सिंह नलवी, सरदार बलदेव सिंह हाबड़ी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार गुरमीत सिंह कलका, उपाध्यक्ष सरदार गुरबीर सिंह तलाकौर, सरदार राजेंद्र सिंह बराड़ा तथा सरपंच सरदार भूपिंदर सिंह लाड़ी सहित कई अन्य वरिष्ठ सदस्यों एवं सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया।
वहीं गुरतेज सिंह का कहना है कि यह धरना हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान कामकाज को लेकर गंभीर चिंताओं को सामने रखने तथा कमेटी में पारदर्शिता, जवाबदेही, सामूहिक निर्णय और ठोस कार्रवाई की मांग मांग को लेकर दिया जा रहा है। समर्थन देने वाले सदस्यों ने कहा कि उठाए जा रहे मुद्दे किसी व्यक्ति विशेष के निजी मामले नहीं हैं, बल्कि ये हरियाणा की सिख संस्था की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। इसलिए निर्वाचित सदस्यों तथा सिख संगत को इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलना आवश्यक है।
सदस्यों ने एक बार फिर कमेटी के अध्यक्ष सरदार जगदीश सिंह झींडा से मांग की कि वे कमेटी के कामकाज को लेकर खुली और पारदर्शी बहस के लिए सामने आएं तथा निर्वाचित सदस्यों और सिख संगत द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब दें। सदस्यों ने विशेष रूप से धर्म प्रचार, गुरुद्वारा प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता, संस्था के विकास तथा सिख संगत की भलाई के लिए किए गए ठोस कार्यों और भविष्य की नीति के संबंध में स्पष्टता की मांग की।
कमेटी की गरिमा व पारदर्शिता के लिए प्रयास
सरदार गुरतेज सिंह ने कहा कि यह धरना किसी व्यक्ति विशेष के व्यक्तिगत विरोध में नहीं, बल्कि हरियाणा कमेटी की गरिमा, पारदर्शिता और उस उद्देश्य की रक्षा के लिए एक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रयास है, जिसके लिए यह संस्था बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कमेटी की कुर्सी किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सिख संगत की अमानत है और इसकी कार्यप्रणाली संगत के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए।
झींडा बोले, -जनरल हाउस में रखने की बातें सड़क पर कर रहे, खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं देख रहे
हरियाणा कमेटी प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि जो लोग धरना दे रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि ये मुद्दे जनरल हाउस में रखने चाहिए न कि सड़क पर। जनरल हाउस की बैठकें भी इसी तरह कुछ सदस्य नहीं होने देते और फिर मुद्दे भी उठाते हैं। हर सदस्य को अपनी जवाबदेही भी देखनी चाहिए। यह मुद्दे पूरी कमेटी के हैं और इन पर बातचीत व प्रक्रिया जनरल हाउस की बैठक में ही संभव होती है।
न्यायिक आयोग से भी कुछ पदाधिकारी व सदस्य मिलने की चर्चा
वहीं चर्चा है कि कुछ पदाधिकारी व सदस्य न्यायिक आयोग से भी मिले हैं, जहां विस्तार से पूरे हालात पर चर्चा की गई है। हालांकि मंगलवार देर शाम तक आयोग की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया या आदेश जारी नहीं किया गया लेकिन यह मुलाकात संगत के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है।