फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंदिर हटाने को लेकर गांव में तनाव

विज्ञापन
tempule - फोटो : Kurukshetra
विज्ञापन
पचास वर्ष पुराने प्राचीन शिव मंदिर को क्षति पहुंचाने को लेकर गांव सैनी माजरा में विवाद बढ़ गया है। शिव मंदिर कमेटी के सदस्य जहां मंदिर के बने रहने के पक्ष में है। वहीं कुछ लोग मंदिर को तोड़ने के पक्ष में है। मंदिर कमेटी सदस्यों ने सरपंच पर मिली भगत कर मंदिर को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया।
विज्ञापन

पुजारी काला राम, ग्रामीण राहुल, राजीव कुमार, कृष्ण कुमार, सतपाल, रोहित, राज कुमार, शिव कुमार व रामकुमार ने सरपंच पर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में स्थित करीब 50 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर फोर लाइन हाइवे की जमीन में आ गया है। ग्रामीणों ने मंदिर के साथ छेड़छाड़ न करने की गुहार लगाई थी। ग्रामीणों की आस्था को देखते हुए प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि मंदिर के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी, जिसके बाद हाइवे निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन अब गांव के सरपंच मिली भगत कर मंदिर को ढहाने पर लगा हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि कईं वर्ष पुराने इस मंदिर के साथ ग्रामीणों की आस्था जुड़ी हुई है और गांव में इसके अलावा कोई अन्य शिव मंदिर भी नहीं है। ऐसे में सरपंच तानाशाही कर मंदिर को तुड़वाने के पक्ष में है। मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले तीन दिवसीय भंडारे में दूरदराज के इलाकों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और शिव मंदिर में अपनी आस्था जताते हैं। गांव सैनी माजरा में ही शिव मंदिर की एक पंजीकृत कमेटी है, जो प्रशासन द्वारा मान्य है, लेकिन ग्राम पंचायत सैनी माजरा के सरपंच अपनी पावर का दुरुपयोग करते हुए प्रशासन की मिली भगत से शिव मंदिर को ढहाने के लिए दिन-रात कौशिश कर रहे है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मंदिर के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए। वहीं सरपंच कृष्ण सैनी से कहा कि ग्राम पंचायत मंदिर को ढहाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने बताया कि मंदिर हाइवे की जमीन में आ चुका है, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की सहमति से पुराने मंदिर से एक ईंट लेकर दूसरी जगह पर मंदिर निर्माण कार्य किया जाएगा, जिसके लिए सभी ने सहमति जताई थी। ग्राम पंचायत की इसमें कोई भूमिका नहीं है। यह सब हाइवे अथॉरिटी के दिशा निर्देश पर हो रहा है। ग्राम पंचायत का इरादा किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें