स्वास्थ्य विभाग ने जिले में गिरते लिंगानुपात को बढ़ाने के लिए सख्ती का रूख अपना लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला में कार्यरत आशा वर्करों को लिंगानुपात घटने के कारण नोटिस जारी कर दिया है। यदि आशा वर्करों से संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है तो उन्हें अपनी सेवाओं से हटा भी सकते हैं।
जिला के सिविल सर्जन डॉ. एसके नैन ने बताया कि जिले की 146 आशावर्कर, ब्लॉक आशावर्कर कॉडिनेटर को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह नोटिस इन्हें जिले में गिरते लिंगानुपात के चलते दिया गया है। अगर मांगे गई सूचना में दिया गया उत्तर संतोषजनक नहीं होगा तो सेवाएं समाप्त होने में देरी नहीं लगेगी। जारी नोटिस में लिखा गया है कि आपके द्वारा गिरते लिंगानुपात के लिए क्या और कब कार्रवाई की गई है। लिंगानुपात में पिछड़ने की रिपोर्ट अभी तक संबंधित अधिकारी को क्यों नहीं पेश की गई है। ऐसा नहीं किया गया है तो इसका कारण स्पष्ट करें। इसके लिए संतोषजनक जवाब दें। अगर इस बाबत संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संभव है कि आपकों सेवाओं की समाप्ति हो जाएगी। वहीं कारण बताओ नोटिस मिल जाने के बाद संबंधित आशा वर्कर एवं आशा वर्कर कॉडिनेटरों में चिंता की लहर दौड़ गई है। वे सभी अपने स्तर पर नोटिस का जवाब देने में जुट गई हैं। अब सारा मामला आशा वर्करों के जवाब पर निर्भर है कि वे क्या जवाब अधिकारी को सौंपती हैं।
हरियाणा में सबसे पिछड़े जिला में है कुरुक्षेत्र
एलएनजेपी नागरिक अस्पताल से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2000 में कुरुक्षेत्र जिला का लिंगानुपात पूरे देश में अन्य जिलों के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर था। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागू स्कीमों व अन्य योजनाओं के बाद पिछले 16 वर्षों में कुरुक्षेत्र जिले के लिंगानुपात में बस इतना ही सुधार आया है। अब कुरुक्षेत्र जिला पूरे भारत में नहीं बल्कि हरियाणा राज्य में 21वें पायदान पर है। कहने का अर्थ है कि एक हजार लड़कों के पीछे ताजा सूचना के आधार पर 831 लड़कियां हैं।
वर्जन
जिले में लिंगानुपात की स्थिति गंभीर है। स्वास्थ्य विभाग इसमें बढ़ौतरी के लिए प्रयासरत है। इसमें जज, पुलिस व अन्य अधिकारियों की एक अहम बैठक भी ली गई थी जिसमें आवश्यक दिशा निर्देश व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई थी। हमारा उद्देश्य है कि लिंगानुपात की स्थिति 900 के पार हो जाए और आने वाले समय में एक हजार लड़कों के पीछे एक हजार लड़कियां हो जाएं ताकि कुरुक्षेत्र जिला प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश में ऊंचे पायदान पर पहुंच जाए।
डॉ. एसके नैन, जिला सिविल सर्जन