कुरुक्षेत्र। शिक्षक समाज का आधार स्तंभ हैं और उनका स्वास्थ्य सीधे शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे में शिक्षक का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है और इसके लिए सतर्कता बरतनी चाहिए। यह कहना है आरोग्य जनकल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा का। उन्होंने स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार विषय पर बीआर इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित 2030 वें नि:शुल्क चिकित्सा एवं जागरूकता शिविर में शिक्षकों व शिक्षिकाओं को निरोग और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अवचेतन मन की शक्ति व आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सूत्र साझा किए।
डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि स्वस्थ शिक्षक ही स्वस्थ समाज की नींव रख सकता है। यदि शिक्षक ऊर्जावान होंगे तो उनकी सकारात्मक ऊर्जा विद्यार्थियों तक पहुंचेगी। उन्होंने शिक्षकों को प्रातः काल शीघ्र जागरण, योग-प्राणायाम, समय पर भोजन, पर्याप्त नींद और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने संतुलित आहार, मौसमी फल-सब्जियों का सेवन और अधिक तैलीय-मसालेदार भोजन से परहेज पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि घर में हमारी रसोई ही सबसे बड़ा औषधालय है, यदि हम अपनी थाली में आयुर्वेदिक तत्वों को शामिल करें तो वे दीर्घकाल तक स्वस्थ रह सकते हैं। उन्होंने दालचीनी, अर्जुन छाल चूर्ण, जीरा, सौंफ, इलायची, हल्दी, अदरक, तुलसी, अजवाइन, सेंधा नमक व अन्य आयुर्वेदिक औषधियों आंवला, अश्वगंधा, शतावार, शिलाजीत, एलोवेरा इत्यादि के गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विद्यालय की प्रिंसिपल पूजा कंबोज ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का वाहक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन का प्रेरणास्त्रोत होता है। विद्यालय प्रशासन का प्रयास रहेगा कि भविष्य में भी समय-समय पर इस प्रकार के सार्थक सेमिनार आयोजित किए जायेंगे, ताकि शिक्षक न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत और ऊर्जावान बने रहें। डॉ.शर्मा निस्वार्थ सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का आदर्श उदाहरण बने हुए हैं।