कुरुक्षेत्र। सूरा सो पहचानिए जो लरे दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरे कबहू न छाड़े खेत, ये शब्द उस वीरता का प्रतीक हैं, जो भारत माता की रक्षा में अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटे। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में कारगिल विजय दिवस 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित शौर्य सम्मान दिवस कार्यक्रम में यह पंक्तियां संजीव हो उठीं। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयकारों से हुई। इस दौरान मंच पर उपस्थित अतिथियों और वीर सैनिकों को वीर बलिदानी संजीव कुमार (कौलापुर), सुशील कुमार, मंगतराम और मनदीप सिंह के गांवों से लाई गई मिट्टी से तिलक किया गया। यह तिलक मात्र परंपरा नहीं, एक संकल्प था-उस शौर्य को स्मरण करने का, जो हमारे वीरों ने सीमाओं पर दिखाया।
इस दौरान कारगिल युद्ध के रणबांकुरे सेवानिवृत्त कैप्टन गुरमेल सिंह, सूबेदार रविंद्र कौशिक और सूबेदार स्वर्ण सिंह ने जब युद्ध के अपने प्रेरक अनुभव साझा किए, तो वातावरण जोश, गर्व और भावुकता से भर गया। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि यह भारत की अस्मिता, साहस और संकल्प का प्रतीक है। हमारे वीर सैनिकों ने जिस अदम्य साहस से मातृभूमि की रक्षा की, वह हर भारतीय के हृदय में अमिट है। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान, कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आरएंडआई के डायरेक्टर प्रो. देवेंद्र खुराना ने सेवानिवृत्त कैप्टन गुरमेल सिंह, सूबेदार रविंद्र कौशिक और सूबेदार स्वर्ण सिंह, वीर बलिदानी संजीव कुमार कौलापुर के परिजनों, वीर बलिदानी सुशील कुमार की धर्मपत्नी सुनीता देवी, वीर बलिदानी मंगत राम की धर्मपत्नी सुनीता देवी, बेटे गौरव सैनी, वीर बलिदानी मनदीप सिंह की माता निर्मला देवी व भाई संदीप सिंह को शॉल देकर सम्मानित किया।